नई दिल्ली, 16 दिसंबर 2025। Lal Qila Blast: दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर 2025 को हुए भीषण कार बम विस्फोट ने राजधानी को हिला कर रख दिया था। इस आतंकी हमले में 13 से अधिक लोगों की मौत हुई और दर्जनों घायल हुए। जांच में पता चला कि विस्फोट में अमोनियम नाइट्रेट आधारित विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ था, जो मुख्य रूप से कृषि खाद में उपयोग होता है।
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इस घटना के बाद दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। गृह विभाग ने विकास विभाग के कृषि विंग को निर्देश दिए हैं कि राजधानी में सभी लाइसेंस प्राप्त कृषि खाद विक्रेताओं की पूरी जानकारी एकत्र की जाए। यह पहल खाद की विक्री, भंडारण और उपयोग पर डेटा-आधारित निगरानी स्थापित करने के उद्देश्य से की गई है।
अमोनियम नाइट्रेट एक संवेदनशील रसायन है, जो कृषि उर्वरक बनाने में तो उपयोगी है, लेकिन गलत हाथों में पड़ने पर विनाशकारी विस्फोटक बन जाता है। फॉरेंसिक जांच में पुष्टि हुई कि लाल किला ब्लास्ट में अमोनियम नाइट्रेट और फ्यूल ऑयल का मिश्रण (ANFO) तथा अन्य पदार्थों का उपयोग हुआ था। दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने ब्लास्ट के तुरंत बाद अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे कि एक निश्चित सीमा से अधिक अमोनियम नाइट्रेट की खरीद-बिक्री करने वाली सभी इकाइयों का डिजिटल रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से रखा जाए।
इस डिजिटल डेटाबेस में विक्रेताओं और खरीदारों की तस्वीरें, पहचान पत्र, पता और अन्य जरूरी विवरण शामिल होंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह डेटा भविष्य में संभावित खतरों की शुरुआती पहचान करने और उन्हें रोकने में मदद करेगा। रिपोर्ट पूरी होने के बाद इस डेटा का उपयोग कैसे किया जाएगा, इसका विस्तृत प्लान तैयार किया जाएगा। अधिकारी ने जोर दिया कि यह कदम सार्वजनिक सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे खतरनाक रसायनों के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा।
घटना के बाद NIA की जांच में हरियाणा के नूंह और फरीदाबाद से अमोनियम नाइट्रेट की बड़ी खेप बरामद हुई थी, जो आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी थी। कई खाद विक्रेताओं को हिरासत में लिया गया और उनकी दुकानों की जांच की गई। दिल्ली पुलिस और अन्य एजेंसियां अब सभी संदिग्ध सप्लाई चेन पर नजर रख रही हैं। अमोनियम नाइट्रेट की बिक्री पहले से ही नियंत्रित है, लेकिन इस घटना ने नियामकों को और सतर्क कर दिया है। PETN और TATP जैसे अन्य विस्फोटकों के साथ इसका मिश्रण इसे और घातक बनाता है।
यह पहल न केवल दिल्ली तक सीमित है, बल्कि आसपास के राज्यों में भी खाद विक्रेताओं की निगरानी बढ़ाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि क्षेत्र में उपयोग होने वाले इन रसायनों पर सख्त ट्रैकिंग से आतंकी गतिविधियों को काफी हद तक रोका जा सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी संवेदनशील सामग्री गलत हाथों में न पहुंचे। इस घटना ने एक बार फिर राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, और अब डिजिटल निगरानी जैसे कदमों से इसे मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
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