ग्रेटर नोएडा, 13 दिसंबर 2025। Jaypee Sports City: ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे इलाके में जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) की रुकी हुई स्पोर्ट्स सिटी परियोजना में 7000 से अधिक फ्लैट खरीदारों को अपने घर मिलने की उम्मीद जग गई है। यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यीड़ा) अब आवासीय क्षेत्र की नई योजना तैयार करके सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगा।
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इससे लंबे समय से इंतजार कर रहे होमबायर्स को राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है। दो दिन पहले लखनऊ में अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार की अध्यक्षता वाली समिति की पहली बैठक हुई। यह समिति इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर जेपी स्पोर्ट्स सिटी मामले के समाधान के लिए गठित की गई थी। बैठक में यीडा ने करी एंड ब्राउन कंपनी द्वारा तैयार स्टडी रिपोर्ट पेश की, जिसमें रुकी परियोजनाओं को पूरा करने के तरीकों का विश्लेषण था।
अधिकारियों ने परियोजना की मौजूदा स्थिति, बिके और खाली फ्लैटों का विवरण, बैंकों का 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बकाया और अन्य चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान 19 मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भी विचार किया गया, जिसमें कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यीडा अपनी योजना बना सकता है, लेकिन कोर्ट की मंजूरी के बाद ही काम शुरू होगा।
बैठक के बाद उच्च अधिकारियों ने यीडा को आवासीय क्षेत्र का विस्तृत प्लान तैयार करने का निर्देश दिया। यह प्लान हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप होगा और सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा। यीडा के सीईओ राकेश कुमार सिंह (या आरके सिंह) ने बताया कि प्लान बनाने की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। कोर्ट से अनुमति मिलते ही निर्माण कार्य आगे बढ़ सकेगा।
यह परियोजना 2009-10 में शुरू हुई थी, जब जेपी की सहायक कंपनी जेपी इंटरनेशनल स्पोर्ट्स को विशेष विकास क्षेत्र (एसडीजेड) योजना के तहत 1000 हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई थी। इसमें स्पोर्ट्स सिटी के साथ बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट भी शामिल है, जहां मोटो जीपी जैसी अंतरराष्ट्रीय रेस हो चुकी हैं। योजना में क्रिकेट स्टेडियम, हॉकी स्टेडियम, टेनिस कोर्ट, फुटबॉल ग्राउंड, स्पोर्ट्स एकेडमी, हेल्थ सेंटर सहित कई विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं विकसित करने का प्रावधान था। लेकिन अब तक खेल सुविधाओं का निर्माण नहीं हो सका।
यीडा अब इन सुविधाओं को विश्व स्तर पर विकसित करने की योजना भी बना रहा है। हालांकि, आवासीय परियोजनाएं सालों से रुकी पड़ी हैं, जिससे हजारों खरीदार परेशान हैं। हाईकोर्ट ने पहले यीडा के जमीन आवंटन रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा था। अब समिति की सक्रियता और सुप्रीम कोर्ट में प्लान पेश होने से होमबायर्स में नई उम्मीद जगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट की मंजूरी मिलने पर परियोजना तेजी से पूरी हो सकती है, बिना खरीदारों पर अतिरिक्त बोझ डाले। यह कदम न केवल फ्लैट डिलीवरी सुनिश्चित करेगा, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास को भी गति देगा।
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