नई दिल्ली, 30 दिसंबर 2025। Jammu & Kashmir Terror: वर्ष 2025 भारत के लिए सुरक्षा चुनौतियों भरा रहा। अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाकर हमला किया, जिसमें 26 लोग मारे गए। नवंबर में दिल्ली के लाल किले के पास एक कार विस्फोट में कम से कम 15 लोगों की मौत हुई, जो एक फिदायीन हमला था। सुरक्षा एजेंसियां आशंका जता रही हैं कि पाकिस्तान से संचालित आतंकी समूह भारत में इससे भी बड़ा हमला करवा सकते हैं।
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जम्मू-कश्मीर के घने जंगलों में इस समय करीब 150 विदेशी आतंकियों (मुख्य रूप से पाकिस्तानी) की मौजूदगी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। नवंबर की एक मल्टी-एजेंसी रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय आतंकियों की संख्या सिंगल डिजिट में रह गई है, लेकिन विदेशी आतंकियों की तादाद लगभग 150 है – इनमें से करीब 70 कश्मीर घाटी में और बाकी जम्मू क्षेत्र में सक्रिय हैं। दिसंबर में भी सांबा और कुपवाड़ा के माछिल सेक्टर में घुसपैठ की कोशिशें दर्ज की गईं।
आतंकियों ने बदले तौर-तरीके
अधिकारियों के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025 में पहलगाम हमले के जवाब में भारत की सैन्य कार्रवाई) के दौरान करीब 50 आतंकी सीमा पार करने में सफल रहे। अब आतंकी स्थानीय नेटवर्क पर भरोसा नहीं कर रहे। वे सर्वाइवल किट्स के साथ जंगलों में छिपे रहते हैं और खाने-पीने की चीजें लेने के लिए सिर्फ एक बार किसी घर या दुकान पर जाते हैं, वह भी पैसे देकर। इससे उनका पता लगाना मुश्किल हो गया है।

बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि ये आतंकी अब छोटी-मोटी वारदातों के लिए नहीं हैं, बल्कि पाकिस्तान से बड़े ऑर्डर का इंतजार कर रहे हैं। पहलगाम, रियासी और सोनमर्ग जैसे हमलों में यही पैटर्न देखा गया। हिंदुओं को टारगेट करने से ज्यादा बवाल और अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित होता है, इसलिए वे फिर से गैर-मुस्लिमों पर हमला कर सकते हैं।
नई चुनौती
दिल्ली का लाल किला हमला एक नया ट्रेंड दिखाता है, जहां कट्टरपंथी बने पढ़े-लिखे लोग (जैसे कश्मीरी डॉक्टर) फिदायीन हमलों में इस्तेमाल हो रहे हैं। यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चिंता का विषय है। अधिकारियों का कहना है कि अब आतंकी “शांत रहो, लंबा सन्नाटा रखो और फिर प्रभावशाली हमला करो” की रणनीति अपना रहे हैं। भारतीय सुरक्षा बल लगातार ऑपरेशंस चला रहे हैं और घुसपैठ को रोकने में सफलता मिल रही है, लेकिन विदेशी आतंकियों की मौजूदगी और उनके बदले तरीके चुनौती बढ़ा रहे हैं। सरकार और सुरक्षा बल सतर्क हैं, ताकि किसी बड़े हमले को रोका जा सके।
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