नई दिल्ली, 12 दिसंबर 2025। Inflation Data: भारत में खुदरा महंगाई दर (सीपीआई आधारित) नवंबर 2025 में थोड़ी बढ़कर 0.71 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह अक्टूबर 2025 के रिकॉर्ड निचले स्तर 0.25 प्रतिशत से 46 आधार अंकों की तेजी दर्शाता है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) द्वारा शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि मुख्य रूप से सब्जियों, अंडे, मीट-मछली, मसालों और ईंधन-प्रकाश श्रेणियों में कीमतों के बढ़ने से हुई है।
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खाद्य महंगाई में भी 111 आधार अंकों की तेजी दर्ज की गई, जो अक्टूबर के -5.02 प्रतिशत से सुधरकर -3.91 प्रतिशत पर आ गई।विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी मौसमी कारकों और आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों से उपजी है। सब्जियों की कीमतों में गिरावट अक्टूबर के 27.57 प्रतिशत से घटकर नवंबर में 22.20 प्रतिशत रह गई, लेकिन फिर भी यह श्रेणी महंगाई को दबाने में महत्वपूर्ण रही।

इसके अलावा, अंडे, मीट-मछली और मसालों जैसे प्रोटीन और मसाला आइटम्स में महंगाई ने समग्र आंकड़ों को ऊपर धकेला। ईंधन और प्रकाश की महंगाई अक्टूबर के 1.98 प्रतिशत से बढ़कर 2.32 प्रतिशत हो गई, जो वैश्विक कच्चे तेल कीमतों से प्रभावित है। ग्रामीण क्षेत्रों में हेडलाइन महंगाई -0.25 प्रतिशत से बढ़कर 0.10 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 0.88 प्रतिशत से 1.40 प्रतिशत पर पहुंच गई।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 2 प्रतिशत रखा है, जो अक्टूबर के 2.6 प्रतिशत के पूर्वानुमान से कम है। मार्च 2026 तिमाही के लिए यह 2.9 प्रतिशत और सितंबर 2026 तक 4.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है। बैंकर ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने कहा, “महंगाई को नीचे रखने वाले कारक जैसे बेस इफेक्ट और सब्जी-पल्स कीमतों में गिरावट बरकरार हैं, लेकिन खाद्य श्रेणी में सुधार से हल्की तेजी आई है।”
आरबीआई ने 2025 में अब तक 125 आधार अंकों की ब्याज दर कटौती की है, जो आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने का प्रयास है।हालांकि, खाद्य मूल्यों में समग्र गिरावट (जैसे दालें और अनाज) ने महंगाई को रिजर्व बैंक के 2-6 प्रतिशत के लक्ष्य बैंड के नीचे ही रखा है। यह नवंबर 2012 के बाद का दूसरा सबसे निचला स्तर है।
उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि जीएसटी दरों में तर्कसंगत बदलाव और अच्छे मानसून ने अन्य श्रेणियों जैसे दूध (3.61 प्रतिशत वेट) और तेल-वसा को स्थिर रखा। लेकिन मध्यम वर्ग के परिवारों पर सब्जी और प्रोटीन आइटम्स की कीमतों का बोझ बढ़ रहा है, जो सीपीआई बास्केट का लगभग 46 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि दिसंबर में वैश्विक कारकों जैसे अमेरिकी टैरिफ नीतियां प्रभाव डाल सकती हैं, लेकिन घरेलू सुधार जैसे कर कटौती और श्रम कानूनों से अर्थव्यवस्था पर असर सीमित रहेगा। कुल मिलाकर, नवंबर का डेटा महंगाई नियंत्रण में सफलता का संकेत देता है, लेकिन खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की जरूरत बनी हुई है। सरकार ने किसानों को बेहतर समर्थन और कोल्ड चेन नेटवर्क बढ़ाने का वादा किया है, ताकि भविष्य में ऐसी उतार-चढ़ाव कम हों।
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