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Indore Water Crisis: दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत, उल्टी-दस्त के 338 नए मामले, 32 मरीज ICU में

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Indore Water Crisis

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इंदौर, 2 जनवरी 2026। Indore Water Crisis: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भगीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल के कारण बड़ा स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया है। नर्मदा पाइपलाइन में लीकेज से सीवेज का गंदा पानी मिलने के कारण उल्टी, दस्त और पेट संबंधी गंभीर बीमारियां फैल गई हैं। लैब रिपोर्ट में फीकल कॉलीफॉर्म, ई-कोलाई और क्लेसबेला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया मिले हैं, जो सीवर के पानी में पाए जाते हैं। इस प्रकोप से अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग प्रभावित हैं।

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आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक 4 से 9 मौतों की पुष्टि हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों और कुछ रिपोर्ट्स में मौतों का आंकड़ा 10 से 13 तक बताया जा रहा है। इनमें एक 5-6 महीने का मासूम बच्चा भी शामिल है, जिसकी मां ने दूध में नल का पानी मिलाकर पिलाया था। स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में 1,714 घरों के 8,571 लोगों की जांच की गई, जिसमें 338 लोगों में उल्टी-दस्त के हल्के लक्षण मिले और उन्हें घर पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। कुल प्रभावितों की संख्या 2,456 से अधिक हो चुकी है।

वर्तमान में 162 से अधिक मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से 32 मरीज ICU में हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। शहर के 27 सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे ‘आपातकाल जैसी स्थिति’ बताया और प्रभावितों के मुफ्त इलाज का आदेश दिया है। मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की सहायता राशि दी जा रही है।

प्रकोप की शुरुआत 24 दिसंबर से हुई, जब इलाके में पानी में बदबू और गंदगी की शिकायतें आईं। जांच में पता चला कि भगीरथपुरा पुलिस चौकी के पास मुख्य पाइपलाइन के ऊपर बने शौचालय से लीकेज हुआ, जिससे सीवेज का पानी पीने के पानी में मिल गया। नगर निगम की लापरवाही सामने आई है – कुछ अधिकारियों को सस्पेंड और डिसमिस किया गया है।

हाईकोर्ट ने सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है, जबकि NHRC ने नोटिस जारी किया है।प्रशासन ने लोगों को नल का पानी उबालकर या फिल्टर करके पीने की सलाह दी है। टैंकरों से साफ पानी की सप्लाई की जा रही है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने लापरवाही स्वीकार की और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। सबसे स्वच्छ शहर का तमगा हासिल करने वाले इंदौर की यह घटना नगर निगम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल उठा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बैक्टीरिया से डायरिया, हैजा जैसी बीमारियां फैलती हैं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरनाक। प्रभावित परिवारों का दर्द बेहिसाब है – कई माता-पिता ने अपने मासूम बच्चों को खो दिया। सरकार पूरे राज्य में पानी की जांच के लिए नई SOP तैयार कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी न हो।फिलहाल, स्थिति नियंत्रण में आ रही है, लेकिन नए मरीजों का आना जारी है। लोगों से अपील है कि किसी भी लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और ORS का इस्तेमाल करें। यह घटना स्वच्छता अभियान की पोल खोलती है और बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी का नतीजा है।

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