काठमांडू/नई दिल्ली, 28 नवंबर 2025। India-Nepal Dispute: नेपाल राष्ट्र बैंक ने 27 नवंबर 2025 को 100 रुपये का नया नोट जारी किया, जिस पर छपा संशोधित राजनीतिक नक्शा भारत के लिए नया सिरदर्द बन गया है। इस नोट में कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को स्पष्ट रूप से नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है। भारत ने तुरंत कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि “एकतरफा कार्रवाई से वास्तविकता नहीं बदलती।” यह विवाद कोई नया नहीं है, बल्कि 200 साल पुरानी सुगौली संधि (1816) से शुरू हुआ है।
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सुगौली संधि में काली नदी (महाकाली) को भारत-नेपाल की पश्चिमी सीमा तय किया गया था, लेकिन नदी का उद्गम बिंदु स्पष्ट नहीं किया गया। भारत का मानना है कि काली नदी का स्रोत वह जगह है जहां से वर्तमान में सीमा चलती है, जबकि नेपाल दावा करता है कि असली काली नदी लिम्पियाधुरा से निकलने वाली कुटी यांकती नदी है। नेपाल के मुताबिक, संधि के अनुसार कुटी यांकती के पूर्व का पूरा क्षेत्र उसका है, जिसमें 335 वर्ग किमी अतिरिक्त इलाका आता है।
कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हैं। यह त्रिदेशीय सीमा क्षेत्र भारत, नेपाल और चीन (तिब्बत) को जोड़ता है। लिपुलेख दर्रा कैलाश-मानसरोवर यात्रा का मुख्य मार्ग है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद से भारत ने कालापानी में अपनी सेना और I TBP तैनात कर रखी है। लिपुलेख दर्रे पर ब्रिटिश काल से ही भारतीय पुलिस चौकी है। 1950 से भारत इन क्षेत्रों का प्रशासनिक नियंत्रण रखता है।
2019 में भारत ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के बाद नया राजनीतिक नक्शा जारी किया और लिपुलेख तक सड़क बनाई, जिसके बाद नेपाल भड़क उठा। 20 मई 2020 को नेपाल ने अपना नया नक्शा जारी किया और जून 2020 में संसद से संवैधानिक संशोधन कराकर इसे आधिकारिक बना दिया। अब उसी नक्शे को 100 रुपये के नोट पर छापकर नेपाल ने विवाद को नया आयाम दे दिया है। भारत का स्पष्ट रुख है कि सीमा विवाद का समाधान द्विपक्षीय बातचीत से ही होगा।
नेपाल के इस कदम से वार्ता की संभावना पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल में आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता और चीन का बढ़ता प्रभाव भी इस आक्रामक रुख का कारण है। दोनों देशों के बीच 98% सीमा तय है, सिर्फ सुस्ता और कालापानी क्षेत्र बाकी हैं। फिर भी नोट पर नक्शा छापना कूटनीतिक शिष्टाचार के खिलाफ माना जा रहा है।फिलहाल भारत-नेपाल संबंधों में तनाव बढ़ गया है। दोनों देशों के विदेश मंत्रालय स्तर की बातचीत रुकी हुई है। देखना यह है कि यह नया विवाद कब तक और कितना गहराता है।
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