नई दिल्ली, 13 नवंबर 2025। Health Tips: सर्दियों का मौसम आते ही कई लोग सुस्ती, लगातार थकान और ज्यादा नींद की शिकायत करने लगते हैं। सुबह उठना मुश्किल, दिनभर आलस छाया रहता है—क्या आपके साथ भी ऐसा होता है? यह कोई आलस्य नहीं, बल्कि शरीर की जैविक प्रतिक्रिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दी में सूरज की कमी, हार्मोनल बदलाव और जीवनशैली में परिवर्तन इसके प्रमुख कारण हैं। आइए, इनके पीछे के वैज्ञानिक राज़ खोलते हैं।सबसे बड़ा कारण है सूरज की रोशनी की कमी। सर्दियों में दिन छोटे हो जाते हैं, जिससे प्राकृतिक प्रकाश कम मिलता है। इससे मेलाटोनिन हार्मोन (जो नींद नियंत्रित करता है) का उत्पादन बढ़ जाता है, जबकि सेरोटोनिन (खुशी का हार्मोन) घट जाता है।
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परिणामस्वरूप, सर्कैडियन रिदम (शरीर की आंतरिक घड़ी) बिगड़ जाती है, और आप दिन में ही नींद महसूस करने लगते हैं। लाइव साइंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह बदलाव विंटर ब्लूज़ या सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (SAD) का रूप ले सकता है, जो उत्तरी गोलार्ध में ज्यादा आम है। दूसरा प्रमुख कारक है विटामिन डी की कमी। सूरज की किरणें त्वचा में विटामिन डी बनाती हैं, जो ऊर्जा और इम्यूनिटी के लिए जरूरी है। सर्दी में धूप कम होने से इसका स्तर गिर जाता है, जिससे थकान, मूड स्विंग्स, मांसपेशियों में कमजोरी और यहां तक कि डिप्रेशन हो सकता है।
एक अध्ययन बताता है कि विंटर में 40% से ज्यादा लोग विटामिन डी डेफिशिएंट हो जाते हैं, जो थकान को दोगुना कर देता है।डाइट और एक्सरसाइज में बदलाव भी जिम्मेदार हैं। ठंड में भारी, कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन (जैसे हलवा, गुड़) की तरफ झुकाव बढ़ता है, जो ब्लड शुगर स्पाइक्स के बाद क्रैश का कारण बनता है। साथ ही, ठंडी हवा और अंधेरा बाहर निकलने से रोकता है, जिससे शारीरिक गतिविधि घट जाती है। कम व्यायाम से एंडॉर्फिन्स (खुशी के केमिकल्स) कम बनते हैं, और मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है।
होलैंड एंड बैरेट की रिपोर्ट के अनुसार, यह चक्र थकान को और गहरा कर देता है।क्या सर्दियों में ज्यादा सोना जरूरी है? कुछ शोध कहते हैं हां—हमारे पूर्वजों की तरह, शरीर ऊर्जा बचाने के लिए रेस्ट मोड में चला जाता है। लेकिन अगर थकान लगातार बनी रहे, तो यह थायरॉइड, एनीमिया या डिप्रेशन का संकेत हो सकता है। डॉक्टर से जांच करवाएं।बचाव के टिप्स: सुबह जल्दी उठकर पर्दे खोलें, 15-20 मिनट धूप लें। विटामिन डी सप्लीमेंट्स (डॉक्टर की सलाह से) लें।
संतुलित डाइट रखें—फल, सब्जियां और प्रोटीन बढ़ाएं। इंडोर एक्सरसाइज जैसे योगा या वॉकिंग करें। लाइट थेरेपी लैंप्स का इस्तेमाल भी फायदेमंद है। मेलाटोनिन को बैलेंस करने के लिए शाम को स्क्रीन टाइम कम करें।सर्दियां स्वास्थ्य के लिए चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन जागरूकता से इन्हें पार किया जा सकता है। स्वस्थ रहें, ऊर्जावान बने रहें!
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