नई दिल्ली, 1 नवंबर 2025। Health Tips: यदि आपको हर बार थोड़ा पानी पीने पर तुरंत टॉयलेट जाने की आदत पड़ गई है, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह केवल हाइड्रेशन की समस्या नहीं, बल्कि डायबिटीज, इंफेक्शन या अन्य स्वास्थ्य असंतुलन का शुरुआती अलार्म हो सकता है।
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डॉक्टरों के अनुसार, अगर यह लक्षण लंबे समय से बने हुए हैं, तो यूरिन टेस्ट या ब्लड शुगर जांच जरूरी है। कभी-कभी यह तनाव या गलत डाइट से जुड़ा होता है, लेकिन अनदेखी करने पर किडनी या ब्लैडर को नुकसान पहुंच सकता है। आइए जानते हैं, इस समस्या के प्रमुख कारण और बचाव के उपाय।
ज्यादा पानी या कैफीन
दिनभर में 2.5-3 लीटर से अधिक पानी पीना शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन अगर इससे ज्यादा हो जाए तो किडनी अतिरिक्त तरल को बाहर फेंकने के लिए बार-बार पेशाब का संकेत देती है। खासकर गर्मियों में यह सामान्य लगता है, लेकिन थोड़ी मात्रा पीने पर भी ऐसा हो तो चिंता बढ़ जाती है।
इसके अलावा, चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक्स में मौजूद कैफीन डाइयूरेटिक का काम करता है। यह पेशाब उत्पादन को तेज करता है, जिससे ब्लैडर जल्दी भर जाता है। महिलाओं में हार्मोनल बदलाव भी इसकी वजह बन सकते हैं। अगर आपका वजन अधिक है, तो पेल्विक क्षेत्र पर दबाव पड़ने से समस्या और बढ़ जाती है।
ओवरएक्टिव ब्लैडर
ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम (OAB) एक आम स्थिति है, जहां ब्लैडर की मांसपेशियां अनावश्यक रूप से सिकुड़ने लगती हैं। इससे थोड़ा सा तरल भरते ही पेशाब की तीव्र इच्छा होती है। यह उम्र बढ़ने, न्यूरोलॉजिकल इश्यूज या स्ट्रेस से जुड़ा हो सकता है। लक्षणों में रात में बार-बार उठना भी शामिल है, जो नींद चुरा लेता है। अगर अनुपचारित छोड़ दिया जाए, तो यह दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकता है।
डायबिटीज, UTI या किडनी स्टोन
बार-बार पेशाब डायबिटीज मेलिटस का प्रमुख लक्षण है। हाई ब्लड शुगर पर शरीर ग्लूकोज को यूरिन से बाहर निकालता है, जिससे प्यास और थकान साथ आती है। महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) ज्यादा आम है, इसमें बैक्टीरिया ब्लैडर को संक्रमित करते हैं, जिससे जलन, दर्द और बदबूदार पेशाब होता है। किडनी स्टोन भी अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार होता है, पथरी के कारण यूरिन फ्लो बाधित होता है, जिससे निचले पेट में दर्द और लगातार पेशाब की जरूरत महसूस होती है। पेशाब का रंग गहरा या खून युक्त हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाने का इशारा है।
इन उपायों से पाएं राहत
इस समस्या को काबू करने के लिए जीवनशैली में बदलाव लाएं। सबसे पहले, पानी को 1.5-2 लीटर तक सीमित रखें और दिनभर में बराबर अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा पिएं। कैफीनयुक्त पेय और मसालेदार भोजन कम करें। कीगल एक्सरसाइज पेल्विक मसल्स को 5-10 सेकंड तक सिकोड़कर छोड़ना ब्लैडर कंट्रोल मजबूत करती है, रोज 10-15 बार करें।
ब्लैडर ट्रेनिंग अपनाएं
पेशाब की इच्छा पर 5-10 मिनट रुकें, ताकि क्षमता बढ़े। वजन घटाना और योग-मेडिटेशन से स्ट्रेस कम करें। अगर लक्षण बने रहें, तो यूरोलॉजिस्ट से सलाह लें, दवाएं या थेरेपी से स्थायी राहत मिल सकती है। स्वस्थ ब्लैडर के लिए समय पर जांच ही कुंजी है।
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