गुवाहाटी, 24 नवंबर 2025। Guwahati Test: गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में खेले जा रहे भारत-साउथ अफ्रीका दूसरे टेस्ट मैच में टीम इंडिया का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। पहले बल्लेबाजी करते हुए साउथ अफ्रीका ने 151.1 ओवरों में 489 रन बनाए, जिसमें सेनुरन मुथुसामी का शतक (109) और मार्को जानसेन का 93 रनों का योगदान अहम रहा। भारतीय गेंदबाजों को दो पूरे दिनों तक मेहनत करनी पड़ी, लेकिन विकेट लेने में कठिनाई हुई।
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कुलदीप यादव ने 4 विकेट लिए, लेकिन बाकी गेंदबाज महंगे साबित हुए। इसके जवाब में भारत की पारी 201 रनों पर सिमट गई, जो 288 रनों से पीछे थी। दूसरे दिन की समाप्ति पर ओपनर्स यशस्वी जायसवाल (7*) और केएल राहुल (2*) ने 6.1 ओवरों में 9/0 का स्कोर बनाया, लेकिन तीसरे दिन बैटिंग फिर ढह गई। दिन 3 के अंत तक भारत 174/7 पर सिमट गया, जो 315 रनों से पीछे था। मार्को जानसेन ने शानदार गेंदबाजी की, जबकि भारतीय बल्लेबाजों ने धैर्य की कमी दिखाई।
Stumps on Day 3️⃣
We will resume proceedings tomorrow with South Africa leading by 314 runs.
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— BCCI (@BCCI) November 24, 2025
हरभजन सिंह जैसे पूर्व दिग्गजों ने फील्डिंग प्लानिंग पर सवाल उठाए, तो हर्षा भोगले ने बैटिंग की बेचैनी पर तंज कसा। यह समस्या केवल गुवाहाटी तक सीमित नहीं। पिछले कुछ समय से भारत घरेलू मैदानों पर लगातार संघर्ष कर रहा है। पहले टेस्ट में कोलकाता में हार के बाद यह दूसरी हार की ओर इशारा कर रहा है। बल्लेबाजी में आईपीएल स्टाइल की आक्रामकता तो है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट के लिए जरूरी धैर्य और डिफेंस की कमी साफ दिख रही है।
निचला क्रम फुस्स साबित हो रहा है, और ऊपरी क्रम भी स्थिरता नहीं दिखा पा रहा। गेंदबाजी में भी धार की कमी, खासकर स्पिन के अलावा। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि अनुभवी मोहम्मद शमी को क्यों नहीं चुना जा रहा? शमी घरेलू क्रिकेट में लगातार विकेट ले रहे हैं, और सौरव गांगुली जैसे दिग्गजों ने उनकी वापसी की मांग की है। फिर भी मैनेजमेंट उन्हें बेंच पर बिठाए हुए है। इसी तरह, सरफराज खान और करुण नायर जैसे घरेलू परफॉर्मर्स को मौका क्यों नहीं? करुण नायर ने इंग्लैंड सीरीज में कमबैक किया था, लेकिन फिर ड्रॉप।
सरफराज घरेलू मैदानों पर रन बरसा रहे हैं, लेकिन आईपीएल परफॉर्मेंस वाले साई सुदर्शन को प्राथमिकता मिल रही है। टीम में अनुभव और धैर्य की कमी स्पष्ट है। साउथ अफ्रीका के निचले क्रम ने 151 ओवरों तक भारतीय गेंदबाजों को बेबस किया, जो तीन वनडे इनिंग्स के बराबर है। भारत को अब चमत्कार की जरूरत है, लेकिन चयन नीति पर सवाल उठ रहे हैं। क्या मैनेजमेंट युवा प्रयोगों के चक्कर में अनुभव को नजरअंदाज कर रहा है? यह सीरीज भारत के टेस्ट भविष्य के लिए अहम सबक साबित हो सकती है।








