नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2025। GRAP-2 Rules: दिल्ली-एनसीआर में सर्दी की दस्तक के साथ ही वायु प्रदूषण का संकट फिर से गहरा गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) कई इलाकों में 500 के पार पहुंच चुका है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।
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इस खतरनाक स्थिति को काबू करने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) की दूसरी स्टेज लागू कर दी गई है। लेकिन अफसोस, GRAP-2 के नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है, जिससे लाखों निवासियों की सेहत पर संकट मंडरा रहा है।मुख्य उल्लंघनों में निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण उपकरणों का बंद पड़ा होना प्रमुख है। मयूर विहार, कश्मीरी गेट, मंडी हाउस, अक्षरधाम, वजीरपुर, पंजाबी बाग, ओखला, करोल बाग, शाहदारा और द्वारका जैसे इलाकों में सड़क किनारे गड्ढों में मिट्टी जमा हो रही है, जिससे हवा में धूल का गुबार छा जाता है।

निर्माण सामग्री खुले में बिखरी पड़ी है और पानी का छिड़काव तो दूर की बात है। इसके अलावा, खुले में कूड़ा और बायोमास जलाने की घटनाएं आम हो गई हैं, जो स्मॉग की परत को और मोटा कर रही हैं। बिजली कटौती के दौरान डीजल जनरेटरों का अवैध उपयोग भी जारी है, जो हवा को और जहरीला बना रहा है।इन उल्लंघनों का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। सुबह-शाम टहलने वाले बुजुर्गों और बच्चों को सांस लेने में भारी दिक्कत हो रही है।
कामकाजी युवाओं, खासकर महिलाओं को मास्क लगाकर ही घर से निकलना पड़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पीएम 2.5 का स्तर 1000 के पार पहुंच गया है, जो फेफड़ों और हृदय संबंधी बीमारियों को बढ़ावा दे रहा है। दिल्ली में करीब 2 करोड़ लोग रहते हैं, जिनमें से लाखों अस्थमा, ब्रॉन्काइटिस जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं। दिवाली जैसे त्योहारों के करीब आते ही यह स्थिति और बिगड़ सकती है, अगर तत्काल कदम न उठाए गए।
प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों ने कार्रवाई शुरू तो की है, लेकिन यह अपर्याप्त साबित हो रही है। पिछले 48 घंटों में 235 निर्माण साइटों का निरीक्षण हुआ, जिसमें 57 पर काम पूरी तरह बंद कराया गया। कूड़ा जलाने की 145 शिकायतों पर 5,000 से 20,000 रुपये तक का जुर्माना वसूला गया। लेकिन दिल्ली में 1,000 से अधिक निर्माण साइटें हैं, जबकि निरीक्षण महज 235 ही हुए। डीपीसीसी और नगर निकायों को सख्ती बरतनी होगी।
समाधान के लिए डीजल जनरेटर पर पूर्ण प्रतिबंध (आपात सेवाओं को छोड़कर), सड़कों पर मैकेनिकल स्वीपिंग, वैक्यूम क्लीनिंग और एंटी-स्मॉग गन से पानी छिड़काव जरूरी है। सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देकर ट्रैफिक कम किया जाए, पार्किंग शुल्क दोगुना हो और औद्योगिक उत्सर्जन की जांच हो। जन जागरूकता अभियान चलाकर कूड़ा जलाने पर रोक लगाई जाए। अगर ये कदम न उठे, तो लाखों जिंदगियां खतरे में पड़ सकती हैं। समय रहते जागें, वरना दिल्ली की हवा ‘गैंस चैंबर’ बन जाएगी।
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