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Gonda Politics: गोंडा की राजनीति में नया सूरजमुखी, करनैलगंज विधायक अजय सिंह– अनुशासन, विकास और भविष्य की चमक

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Karnailganj MLA Ajay Singh

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गोंडा, 10 दिसंबर 2025। Gonda Politics: उत्तर प्रदेश की ग्रामीण राजनीति अक्सर पुरानी सियासी खानदानों की जकड़न और युवा ऊर्जा के टकराव की कहानी रही है। लेकिन गोंडा जिले के करनैलगंज विधानसभा क्षेत्र से उभरते भाजपा विधायक अजय सिंह इस परिपाटी को तोड़ने का संकेत दे रहे हैं। 42 वर्षीय सिंह, जो 2022 में पहली बार विधायक बने, न केवल पार्टी के प्रति अटल वफादारी दिखाते हैं बल्कि स्थानीय विकास को नई गति भी दे रहे हैं। मेरी तीन महीने लंबी रिसर्च – जिसमें स्थानीय साक्षात्कार, सरकारी दस्तावेजों की पड़ताल और पार्टी स्रोतों से बातचीत शामिल है – बताती है कि सिंह न सिर्फ वर्तमान की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, बल्कि भविष्य के एक मजबूत, संतुलित नेता के रूप में तैयार हो रहे हैं। क्या वे गोंडा को लखनऊ के राजनीतिक परिदृश्य में नई ऊंचाई देंगे? आइए, उनकी यात्रा को करीब से देखें।

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जड़ें मजबूत, उड़ान नई

एक साधारण शुरुआत से असाधारण उभार, अजय कुमार सिंह का जन्म 1 जुलाई 1983 को गोंडा के एक साधारण किसान परिवार में हुआ। स्थानीय शिक्षण संस्थानों से शिक्षा ग्रहण करने के बाद वे परसपुर ब्लॉक प्रमुख के रूप में राजनीति में उतरे। 2021 में निर्विरोध चुनाव जीतकर उन्होंने अपनी संगठन क्षमता साबित की, लेकिन असली परीक्षा आई 2022 के विधानसभा चुनाव में, जब भाजपा ने छह बार के पूर्व विधायक कुंवर अजय प्रताप सिंह ‘लल्ला भैया’ का टिकट काटकर युवा चेहरे पर दांव लगाया। (नोट: लल्ला भैया का निधन जनवरी 2025 में हुआ, जो स्थानीय राजनीति में एक युग का अंत था।)

Karnailganj MLA Ajay Singh

सिंह ने समाजवादी पार्टी के मजबूत दावेदार योगेश प्रताप सिंह को 35,472 वोटों से हराकर इतिहास रचा। मेरी रिसर्च में मिले सरकारी चुनाव आंकड़ों के अनुसार, यह जीत भाजपा की ग्रामीण रणनीति का बेहतरीन उदाहरण थी – जहां सिंह ने OBC और किसान वोट बैंक को एकजुट किया। पार्टी हाईकमान के एक वरिष्ठ नेता (नाम गोपनीय) ने बताया, “अजय सिंह में वो दुर्लभ संयोजन है – युवा ऊर्जा के साथ बुजुर्गों जैसी धैर्य। वे मोदी-योगी मॉडल के प्रतीक हैं।” यह जीत न सिर्फ व्यक्तिगत विजय थी, बल्कि गोंडा जैसे पिछड़े जिले में भाजपा की पकड़ मजबूत करने का संकेत।

विकास की लकीरें खींचते हुए: काम जो बोलते हैं

रिसर्च के दौरान मैंने करनैलगंज के 15 गांवों का दौरा किया, जहां ग्रामीणों ने सिंह के कार्यों की तारीफ की। सरयू नदी पर प्रस्तावित छह-लेन पुल की डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार कराने से लेकर करनैलगंज बस स्टैंड के लिए 10 एकड़ जमीन अधिग्रहण कराने तक, सिंह ने बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस किया। परसपुर इंटर कॉलेज में नई कक्षाओं का निर्माण – जिसका उद्घाटन सिंह ने खुद किया – ने शिक्षा को नई दिशा दी। एक स्थानीय शिक्षक ने कहा, “पहले बच्चे दूर के स्कूल जाते थे, अब घर के पास ही गुणवत्ता मिल रही है।”

स्वास्थ्य और आर्थिक मोर्चे पर भी सक्रियता

सेवा पखवाड़ा के तहत टीबी मरीजों को 500 से अधिक पोषण किट वितरित कीं, आयुष्मान भारत कार्डों का विस्तार किया और जीएसटी जागरूकता शिविरों से व्यापारियों को जोड़ा। जनता दर्शन कार्यक्रमों में व्यक्तिगत हस्तक्षेप से सैकड़ों विवाद सुलझे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, उनके क्षेत्र में सड़क निर्माण 30% बढ़ा है। ये कदम बताते हैं कि सिंह सिर्फ भाषणबाजी नहीं, बल्कि क्रियान्वयन पर विश्वास रखते हैं। एक पूर्व IAS अधिकारी (रिसर्च स्रोत) ने कहा, “अजय सिंह में प्रशासनिक समझ है, जो उन्हें भविष्य में कैबिनेट मंत्री या संगठन महामंत्री बना सकती है।”

चुनौतियों का सामना: विवाद जो सबक बने

कोई भी उभरता नेता विवादों से अछूता नहीं। मेरी जांच में सामने आया कि हाल के महीनों में दो घटनाएं सुर्खियां बनीं – एक भाजपा कार्यकर्ता राहुल चौहान का हमले का आरोप और ग्रामीण मोहित तिवारी की फर्जी मुकदमों की शिकायत। एक वायरल वीडियो में सिंह को एक चौकी इंचार्ज को फटकारते देखा गया, जिसे कुछ ने ‘सख्ती’ तो कुछ ने ‘आक्रामकता’ कहा।

पार्टी के आंतरिक सर्कल में भी पुराने कार्यकर्ताओं का असंतोष झलकता है, लेकिन सिंह की प्रतिक्रिया परिपक्व रही। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा, “मैं गलतियों से सीखता हूं। पार्टी एकता मेरी प्राथमिकता है।”  रिसर्च से पता चला कि इन विवादों के बावजूद, उनके समर्थक आधार मजबूत हैं – 70% ग्रामीण (मेरे सर्वे में) उन्हें ‘मेहनती’ मानते हैं। यह संकेत देता है कि सिंह चुनौतियों को अवसर में बदलना जानते हैं, जो एक अच्छे नेता की पहचान है।

भविष्य का चेहरा: गोंडा से लखनऊ तक की उड़ान

अंत में, रिसर्च का निष्कर्ष यही है – अजय सिंह गोंडा राजनीति के भविष्य हैं। उनकी उम्र, अनुशासन और विकास-केंद्रित दृष्टि उन्हें 2027 चुनावों में न सिर्फ दोबारा टिकट, बल्कि बड़े दायित्वों के लिए तैयार करती है। जैसा कि एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, “वे योगी आदित्यनाथ की तरह ग्रामीण एजेंडे को मजबूत करेंगे।” अगर सिंह आंतरिक कलह को संभाल लेते हैं और विकास की रफ्तार बनाए रखते हैं, तो करनैलगंज न सिर्फ जिले का गौरव बनेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय लिखेगा। गोंडा की मिट्टी से निकले इस युवा को देखकर लगता है – सूरजमुखी की तरह, वे सूर्य की ओर बढ़ते जाएंगे। बाकी वक्त ही बताएगा, लेकिन शुरुआत तो शानदार है।

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