नई दिल्ली, 27 दिसंबर 2025। Gold-Silver Rate: साल 2025 के अंतिम दिनों में सोना और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे ये कीमती धातुएं आम आदमी की पहुंच से काफी दूर हो चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव $4,500 प्रति औंस को पार कर $4,540 तक पहुंच गया, जबकि चांदी ने $77 प्रति औंस का आंकड़ा छू लिया।
इसे भी पढ़ें- Gold-Silver Outlook: 2026 में भी तेज रहेगी सोना-चांदी की रफ्तार, एक्सपर्ट्स बोले- चांदी देगी ज्यादा रिटर्न…
भारत में MCX पर 26 दिसंबर को सोने का फरवरी वायदा भाव करीब ₹1,39,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास रहा, जो ऑल टाइम हाई है। चांदी का मार्च वायदा ₹2,30,000 से ₹2,40,000 प्रति किलो के करीब ट्रेड कर रहा है। रिटेल मार्केट में 24 कैरेट सोने का भाव ₹14,122 प्रति ग्राम और चांदी ₹240 प्रति ग्राम तक पहुंच गया है।पिछले एक सप्ताह में ही सोने में 5-6% और चांदी में 10-15% की उछाल आई है। 19 दिसंबर के आसपास सोना ₹1,34,000 प्रति 10 ग्राम था, जो अब ₹1,39,000-1,40,000 के करीब है।
चांदी में तो और ज्यादा तेजी रही – ₹2,08,000 से बढ़कर ₹2,40,000 प्रति किलो हो गई। साल भर में सोने की कीमतें 70-73% और चांदी की 167-169% तक चढ़ी हैं, जो दशकों में सबसे बड़ी सालाना बढ़ोतरी है। निवेशक गोल्ड-सिल्वर ETF में भारी निवेश कर रहे हैं, जबकि फिजिकल खरीदारी थोड़ी कम हुई है क्योंकि दाम बहुत ऊंचे हो गए हैं।
सोना-चांदी में तेजी की मुख्य वजहें
इस रिकॉर्ड रैली के पीछे कई वैश्विक और आर्थिक कारक हैं: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिकॉर्ड हाई: ग्लोबल मार्केट में सोना $4,540 और चांदी $77 प्रति औंस पर पहुंची, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा।
डॉलर की कमजोरी और फेड रेट कट की उम्मीदें: अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में गिरावट और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे कटौती की संभावना से सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी।
भू-राजनीतिक तनाव: दुनिया भर में बढ़ते संघर्ष, जैसे वेनेजुएला और नाइजीरिया संबंधी घटनाएं, ने निवेशकों को सोना-चांदी जैसे सेफ हेवन एसेट्स की ओर धकेला।
चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड: इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल और ग्रीन टेक्नोलॉजी में चांदी की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे सप्लाई डेफिसिट हो रहा है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: कई देशों के सेंट्रल बैंक बड़ी मात्रा में सोना-चांदी खरीद रहे हैं।
ETF और निवेश प्रवाह: गोल्ड-सिल्वर ETF में रिकॉर्ड इनफ्लो, क्योंकि स्टॉक मार्केट में अनिश्चितता के बीच लोग सुरक्षित विकल्प चुन रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि लॉन्ग टर्म में ये तेजी बनी रहेगी, क्योंकि मुद्रा अवमूल्यन (डेबेसमेंट ट्रेड) और आर्थिक अनिश्चितता जारी है।निवेशकों के लिए सलाहएक्सपर्ट्स कहते हैं कि मांग मजबूत है, लेकिन शॉर्ट टर्म में मुनाफावसूली से थोड़ी गिरावट आ सकती है। फिजिकल सोना-चांदी खरीदने की बजाय गोल्ड/सिल्वर ETF या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में SIP की तरह नियमित निवेश बेहतर है।
इससे औसत लागत कम रहती है और लॉन्ग टर्म में अच्छा रिटर्न मिल सकता है। जोखिम लेने वाले निवेशक MCX फ्यूचर्स में ट्रेड कर सकते हैं, लेकिन सावधानी बरतें क्योंकि उतार-चढ़ाव ज्यादा है। यह तेजी 2025 की आर्थिक अनिश्चितताओं का प्रतिबिंब है, जहां कीमती धातुएं फिर से निवेशकों का पसंदीदा विकल्प बन गई हैं।








