नई दिल्ली, 15 दिसंबर 2025। Gold & Silver Price: भारत में सोने और चांदी की कीमतों में हाल के महीनों में आई तेज़ बढ़ोतरी ने आम लोगों से लेकर निवेशकों तक सभी का ध्यान खींचा है। 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में एक लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने इस बढ़ोतरी की मुख्य वजहों को स्पष्ट किया।
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उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध जैसे हालात, आर्थिक मंदी की आशंका और अनिश्चितता के कारण निवेशक जोखिम भरे बाजारों से निकलकर सोने-चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे इन कीमती धातुओं की मांग बढ़ी है और कीमतें आसमान छू रही हैं।मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत में सोने और चांदी के दाम मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव (अमेरिकी डॉलर में), रुपये की डॉलर के मुकाबले विनिमय दर और लागू टैक्स-शुल्क पर निर्भर करते हैं।
सरकार इन कीमतों के निर्धारण में कोई सीधी भूमिका नहीं निभाती, क्योंकि ये पूरी तरह बाजार आधारित हैं। वैश्विक केंद्रीय बैंक और बड़े संस्थान भी बड़ी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं, जिससे मांग और मजबूत हुई है।चालू वित्त वर्ष में कीमतों में बढ़ोतरी का असर सभी पर एकसमान नहीं है। अलग-अलग राज्यों और समुदायों में सोने-चांदी का सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व अलग होने से प्रभाव भिन्न होता है।
सोना-चांदी न केवल उपभोग की वस्तु हैं, बल्कि निवेश का महत्वपूर्ण माध्यम भी। अनिश्चित समय में इन्हें सुरक्षित संपत्ति माना जाता है। अच्छी बात यह है कि कीमत बढ़ने से उन परिवारों की संपत्ति का मूल्य बढ़ता है जिनके पास पहले से ये धातुएं हैं, जिससे घरेलू धन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के सितंबर तक भारत ने लगभग 26.51 अरब डॉलर का सोना और 3.21 अरब डॉलर की चांदी आयात की है, जो घरेलू मांग की मजबूती को दर्शाता है।
वर्तमान में (15 दिसंबर 2025) भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 1,34,000-1,35,000 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत लगभग 2,00,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास है। ये कीमतें वैश्विक घटनाओं से प्रभावित होकर लगातार बदल रही हैं।यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजार में सोना रिकॉर्ड ऊंचाई पर है। निवेशकों के लिए यह सुरक्षित विकल्प बना हुआ है, लेकिन आम उपभोक्ताओं के लिए शादियों और त्योहारों में खरीदारी महंगी हो गई है। सरकार का मानना है कि बाजार की यह गतिविधि स्वाभाविक है और इसमें हस्तक्षेप की जरूरत नहीं।
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