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Gold Price Fall: अगर ट्रंप के नेतृत्व में ये चार कदम उठे, तो 1 लाख से नीचे लुढ़केगा सोना, चांदी की चमक भी होगी कम

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Gold Silver

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नई दिल्ली, 30 अक्टूबर 2025। Gold Price Fall:  दुनिया की आर्थिक पटरी पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सूत्रधार की भूमिका निभा रहे हैं। हाल के महीनों में मंदी की आशंका, युद्धों की छाया और व्यापारिक तनावों ने सोने-चांदी की कीमतों को आसमान छूने पर मजबूर कर दिया था, लेकिन अब वैश्विक स्थिरता के संकेत मिलने लगे हैं। देशों के बीच रिश्ते सुधर रहे हैं, बातचीत आगे बढ़ रही है।

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एक्सपर्ट्स का मानना है कि, अगर चार बड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रमों में सकारात्मक मोड़ आया, तो सोने का भाव 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे आ सकता है। चांदी में भी भारी गिरावट का खतरा मंडरा रहा है। ट्रंप की नीतियां इन बदलावों की धुरी बन सकती हैं, जिससे निवेशक शेयर बाजार, बॉन्ड और रियल एस्टेट जैसे जोखिम भरे लेकिन लाभदायक क्षेत्रों की ओर रुख कर लेंगे।

सोना हमेशा अनिश्चितता का साथी रहा है। जब दुनिया में उथल-पुथल मची होती है, तो निवेशक ‘सेफ हेवन’ के रूप में सोने पर दांव लगाते हैं, लेकिन शांति लौटते ही इसकी चमक फीकी पड़ जाती है। वर्तमान में एमसीएक्स पर सोने का वायदा भाव 1.17 लाख रुपये के आसपास घूम रहा है, जबकि चांदी 1.05 लाख प्रति किलो पर ट्रेड हो रही है। हालिया गिरावट में सोना 3,200 रुपये और चांदी 3,800 रुपये सस्ती हो चुकी है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि ये तो शुरुआत है। अगर ट्रंप के नेतृत्व में ये चार कदम उठे, तो बाजार में बड़ा धक्का लगेगा।

पहला- अमेरिका-चीन ट्रेड डील

सालों से चले आ रहे व्यापार युद्ध ने वैश्विक सप्लाई चेन को चोट पहुंचाई है। ट्रंप-जिनपिंग की बातचीत से अगर समझौता हुआ, तो टैरिफ कम होंगे, बाजार स्थिर होंगे। निवेशक उद्योगों में लौटेंगे, सोने की मांग घटेगी।

दूसरा- भारत-अमेरिका व्यापार समझौता

भारत, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना खरीदार है। मजबूत साझेदारी से विदेशी निवेश बढ़ेगा, रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होगा। सस्ता रुपया आयातित सोने को महंगा बनाता है, लेकिन मजबूत करेंसी उलटा असर डालेगी और घरेलू कीमतें लुढ़केंगी।

तीसरा- इजरायल-हमास संघर्ष विराम

मध्य पूर्व का तनाव तेल कीमतें बढ़ाता है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाता है। अगर शांति हुई, तो ऊर्जा बाजार स्थिर होंगे। निवेशक रिस्की एसेट्स की ओर मुड़ेंगे, सोना भूल जाएंगे।

चौथा- पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीजफायर

दक्षिण एशिया की अस्थिरता ने निवेशकों को दूर रखा। स्थायी शांति से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था चमकेगी, शेयर बाजार उछालें। सोने-चांदी की चमक पर ग्रहण लगेगा। ट्रंप इन पहलों को अपने ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे से जोड़कर आगे बढ़ा रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ये बदलाव न सिर्फ सोने को 90-95 हजार तक नीचे धकेल सकते हैं, बल्कि चांदी को 80-85 हजार प्रति किलो पर ला सकते हैं। हालांकि, लंबी अवधि में सोना सुरक्षित रहेगा, लेकिन अल्पकालिक गिरावट अवसर भी लाएगी। निवेशक सतर्क रहें, खरीदें या इंतजार करें? बाजार के संकेतों पर नजर रखें।

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