नई दिल्ली, 29 नवंबर 2025। GDP Growth: देश की अर्थव्यवस्था के ताजा आंकड़ों ने जहां सरकार को राहत दी है, वहीं विपक्ष ने इन्हें अविश्वसनीय बताते हुए केंद्र पर निशाना साधा है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही, जो पिछली छह तिमाहियों में सबसे अधिक है। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह दर 5.6 प्रतिशत थी, जबकि पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
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मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 9.1 प्रतिशत की तेज रफ्तार से बढ़ा, जबकि सर्विस सेक्टर ने 9.2 प्रतिशत का योगदान दिया। नॉमिनल जीडीपी 8.7 प्रतिशत बढ़कर 85.25 लाख करोड़ रुपये हो गई।इन आंकड़ों पर खुशी जताते हुए सरकार ने कहा कि यह विकास त्योहारों की मांग, जीएसटी दर कटौती और कम महंगाई के कारण हुआ। मुख्य आर्थिक सलाहकार ने इसे “मजबूत गति” बताया, जो विनिर्माण और सेवाओं के विस्तार से प्रेरित है। हालांकि, कांग्रेस ने इन आंकड़ों को “विपरीत संयोग” करार देते हुए सवाल खड़े कर दिए।
यह भी अजीब संयोग है कि तिमाही GDP के आँकड़े ठीक उसी समय जारी किए गए हैं, जब IMF की वार्षिक रिपोर्ट में भारत के नेशनल अकाउंट्स के आंकड़ों को C ग्रेड दिया गया -जो कि दूसरा सबसे कम मूल्यांकन है।
आंकड़े निराशाजनक बने हुए हैं। Gross Fixed Capital Formation में कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी… pic.twitter.com/PyeDuM6kXe
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) November 28, 2025
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की वार्षिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत के राष्ट्रीय खातों के आंकड़ों को ‘सी’ ग्रेड दिया गया है, जो दूसरा सबसे निचला मूल्यांकन है। “यह विडंबना है कि तिमाही जीडीपी आंकड़े ठीक उसी समय जारी किए गए, जब IMF ने भारतीय आंकड़ों को ‘सी’ ग्रेड दिया। आंकड़ों की स्थिति निराशाजनक बनी हुई है,” रमेश ने लिखा। कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (GFCF) में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं दिख रहा।
“निजी निवेश में नई गति के बिना उच्च जीडीपी वृद्धि लंबे समय तक टिक नहीं सकती। ऐसी कोई गति के सबूत नहीं हैं।” उन्होंने जीडीपी डिफ्लेटर पर भी सवाल उठाए, जो केवल 0.5 प्रतिशत की महंगाई दर्शाता है। “यह अवास्तविक है। करोड़ों परिवार दैनिक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं, लेकिन आंकड़े उनके अनुभव से मेल नहीं खाते। सरकार महंगाई को कम करके जीडीपी को बढ़ा-चढ़ाकर दिखा रही है।” रमेश ने आरोप लगाया कि आंकड़ों की गुणवत्ता पर IMF का निम्न मूल्यांकन विकास दावों की सच्चाई पर सवाल उठाता है। दूसरी ओर, IMF ने भारत की अर्थव्यवस्था की सराहना की है।
अपनी वार्षिक समीक्षा में एजेंसी ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि के बाद 2025-26 में 6.6 प्रतिशत का अनुमान है। पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की मजबूत शुरुआत को सकारात्मक बताया गया। IMF ने जीएसटी सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये अमेरिका के 50 प्रतिशत शुल्क प्रभाव से निपटने में मदद करेंगे। कार्यकारी निदेशक मंडल ने भारत को “लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाली अर्थव्यवस्था” करार दिया। हालांकि, ‘सी’ ग्रेड आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल बने हुए हैं, जो पिछले वर्ष से अपरिवर्तित है। यह विवाद तब भड़का जब NSO ने आंकड़े जारी किए, जो IMF रिपोर्ट के ठीक बाद थे।
कांग्रेस का कहना है कि बिना निजी निवेश के सुधार के यह विकास अस्थिर है। विशेषज्ञों का मानना है कि नॉमिनल जीडीपी की धीमी गति (8.7%) राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को चुनौती दे सकती है। सरकार ने घरेलू वित्तीय दायित्वों में कमी को सकारात्मक बताया, जो FY23 के 5.9% से घटकर FY25 में 4.7% हो गया। अब सियासी घमासान और तेज हो गया है, जहां विपक्ष आंकड़ों की पारदर्शिता पर जोर दे रहा है। क्या यह विकास दर वाकई टिकाऊ है? यह सवाल अर्थव्यवस्था के भविष्य को परिभाषित करेगा।
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