दिल्ली, 29 अक्टूबर 2025। Gaza Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता से बने गाजा शांति समझौते को अब गंभीर झटका लग चुका है। इजरायल ने हमास पर सीजफायर तोड़ने का आरोप लगाते हुए गाजा पट्टी पर जोरदार एयरस्ट्राइक की है, जिसमें कम से कम 33 फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है। कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं, जिन्हें आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इस घटना ने न केवल क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा दिया है, बल्कि ट्रंप की कूटनीतिक कोशिशों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
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एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली सेना ने रात भर चले हवाई हमलों में हमास के कथित ठिकानों को निशाना बनाया। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस कार्रवाई को ‘तत्काल और शक्तिशाली प्रतिक्रिया’ बताते हुए कहा कि हमास ने बार-बार उकसावे भरे हमले किए हैं, जिससे शांति प्रक्रिया खतरे में पड़ गई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हमास ने ट्रंप के समझौते की भावना का पालन नहीं किया। वे बंधकों को रिहा करने के वादे से मुकर गए और बहाने बनाने लगे।”

नेतन्याहू का गुस्सा साफ झलक रहा था, जब उन्होंने हमास को ‘सीजफायर का उल्लंघन करने वाला आतंकवादी संगठन’ करार दिया। इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने भी हमास पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि हमास ने इजरायली सैनिकों पर सीधा हमला किया और मृत बंधकों को लौटाने की शर्त का खुला उल्लंघन किया। काट्ज ने चेतावनी दी कि ऐसी कार्रवाइयों का जवाब कड़ा दिया जाएगा, ताकि भविष्य में कोई भी समझौते का दुरुपयोग न कर सके।
इजरायल के अनुसार, ये हमले हमास के रॉकेट लॉन्च साइट्स और हथियार भंडारण सुविधाओं पर केंद्रित थे, लेकिन नागरिक क्षेत्रों में भी नुकसान हुआ है। दूसरी ओर, हमास ने इन आरोपों का सिरे से खारिज किया है। संगठन के प्रवक्ता ने दावा किया कि उन्होंने कोई हमला नहीं किया और न ही शांति समझौते को तोड़ा। उन्होंने इजरायल को ‘आक्रामक’ बताते हुए कहा कि ये एयरस्ट्राइक शांति की आड़ में फिलिस्तीनियों पर अत्याचार हैं। हमास के मुताबिक, बंधकों की रिहाई पर बातचीत जारी है, लेकिन इजरायल की ‘उकसावे वाली कार्रवाइयों’ के कारण प्रक्रिया रुकी हुई है।
गौरतलब है कि, ट्रंप ने हाल ही में दुनिया के कई प्रमुख नेताओं के साथ बैठकें कर इजरायल-हमास के बीच युद्धविराम करवाया था। उनके 10-सूत्री शांति प्लान में बंधकों की तत्काल रिहाई, गाजा में मानवीय सहायता, सीमा सुरक्षा और लंबी अवधि की शांति वार्ता जैसे बिंदु शामिल थे। ट्रंप ने इसे ‘मध्य पूर्व का ऐतिहासिक समझौता’ बताया था, लेकिन अब यह योजना पटरी से उतरती नजर आ रही है। व्हाइट हाउस से जारी बयान में ट्रंप ने कहा, “हम शांति के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उल्लंघन बर्दाश्त नहीं होगा।”
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विफलता अमेरिकी कूटनीति की कमजोरी को उजागर करती है, खासकर जब हमास और इजरायल दोनों ही एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। यूएन महासचिव ने चिंता जताई कि ये हमले गाजा में पहले से ही खराब मानवीय स्थिति को और बिगाड़ देंगे, जहां लाखों लोग विस्थापित हैं। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की कोशिशें तेज हो गई हैं, लेकिन नेतन्याहू की सख्ती और हमास की जिद से हालात जटिल बने हुए हैं। क्या ट्रंप का ‘जुगर्नॉट’ प्लान पूरी तरह फेल हो जाएगा, या फिर कोई नया मोड़ आएगा? यह सवाल अब मध्य पूर्व की सियासत पर छाया हुआ है।
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