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Gautam Adani: भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्व पटल पर लाने के लिए गौतम अडानी का 100 करोड़ का मेगा ऐलान

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Gautam Adani

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अहमदाबाद/नई दिल्ली, 26 नवंबर 2025। Gautam Adani: अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने भारतीय ज्ञान-विज्ञान और प्राचीन सभ्यता को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्होंने “इंडोलॉजी मिशन” के लिए 100 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि देने की घोषणा की है। इसका मकसद वेद, उपनिषद, दर्शनशास्त्र, आयुर्वेद, योग, ज्योतिष, वास्तु, संस्कृत साहित्य और भारतीय गणित-अंकगणित जैसे विषयों को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों तक पहुंचाना है।

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गौतम अडानी ने कहा, “पश्चिमी दुनिया ने सदियों तक अपनी ज्ञान परंपरा को बढ़ावा दिया, जबकि हम अपनी ही विरासत से दूर होते गए। अब समय आ गया है कि हम अपने ज्ञान को फिर से जीवंत करें और दुनिया को बताएं कि आधुनिक विज्ञान की कई जड़ें भारत में ही हैं। जीरो, दशमलव प्रणाली, प्लास्टिक सर्जरी, परमाणु सिद्धांत से लेकर क्वांटम फिजिक्स तक के विचार भारतीय ग्रंथों में पहले से मौजूद थे।”इस 100 करोड़ के फंड से निम्नलिखित प्रमुख कार्य होंगे।

  • विश्व स्तर के इंडोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना
  • ऑक्सफोर्ड, हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड जैसे विश्वविद्यालयों में भारतीय ज्ञान की चेयर स्थापित करना
  • संस्कृत और प्राचीन ग्रंथों का डिजिटल अनुवाद एवं ओपन एक्सेस लाइब्रेरी
  • युवा शोधकर्ताओं के लिए 5-वर्षीय फेलोशिप प्रोग्राम
  • अंतरराष्ट्रीय इंडोलॉजी कॉन्फ्रेंस का सालाना आयोजन
  • स्कूल पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा को शामिल करने की वकालत

अडानी फाउंडेशन इस पूरे मिशन का संचालन करेगा। पहले चरण में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में “अडानी चेयर फॉर इंडियन सिविलाइजेशन स्टडीज” और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में “इंडोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट” शुरू करने की योजना है। गौतम अडानी ने अपने संदेश में कहा, “यह सिर्फ दान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आत्मविश्वास की पुनर्स्थापना का मिशन है। जब तक हम अपने ज्ञान पर गर्व नहीं करेंगे, दुनिया हमें गंभीरता से नहीं लेगी। मैं चाहता हूं कि आने वाली पीढ़ी गर्व से कहे – हम वही सभ्यता हैं जिसने दुनिया को ‘शून्य’ दिया, जिसने योग और आयुर्वेद दिए, जिसने पहले कहा था कि पूरा ब्रह्मांड एक ही ऊर्जा का रूप है।” इस घोषणा के बाद शिक्षा जगत और संस्कृति प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह है। कई विशेषज्ञों ने इसे “भारतीय ज्ञान के पुनर्जागरण” की शुरुआत बताया है।

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