नई दिल्ली, 22 दिसंबर 2025। Gautam Adani: गौतम अडानी की अगुवाई वाली अडानी ग्रुप अब न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में बड़ा कदम उठाने जा रही है। ब्लूमबर्ग और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्रुप उत्तर प्रदेश सरकार के साथ बातचीत कर रहा है ताकि राज्य में कमर्शियल न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट स्थापित किया जा सके।
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यह प्रोजेक्ट आठ स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) पर आधारित होगा, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 200 मेगावाट होगी। इससे कुल 1600 मेगावाट की न्यूक्लियर कैपेसिटी बनेगी। यह कदम भारत सरकार द्वारा हाल ही में न्यूक्लियर सेक्टर को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद आया है। यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब भारत जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

संसद ने 18 दिसंबर 2025 को सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) बिल, 2025 पास किया, जो एटॉमिक एनर्जी एक्ट 1962 और सिविल लायबिलिटी फॉर न्यूक्लियर डैमेज एक्ट 2010 की जगह लेगा। इस बिल से निजी कंपनियां न्यूक्लियर प्लांट्स में निवेश कर सकेंगी, जिससे सेक्टर में करीब 214 बिलियन डॉलर का निवेश आने की उम्मीद है। प्रोजेक्ट पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आधारित होगा।
इसमें सरकारी कंपनी न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) अडानी की ओर से प्लांट को ऑपरेट करेगी। भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) द्वारा डिजाइन और डेवलप किए जा रहे 200 MW SMRs का इस्तेमाल होगा। SMRs पारंपरिक बड़े रिएक्टर्स की तुलना में छोटे, सुरक्षित और फैक्ट्री में बनाए जा सकने वाले होते हैं, जो तेजी से तैनात किए जा सकते हैं।
हालांकि, अभी चुनौतियां बाकी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार को रिएक्टर्स के लिए लगातार पानी की सप्लाई सुनिश्चित करने वाली नदी किनारे उपयुक्त जगह नहीं मिली है। सरकारी मंजूरी मिलने के बाद प्रोजेक्ट पूरा होने में 5-6 साल लग सकते हैं, क्योंकि अडानी ग्रुप इस सेक्टर में नया प्रवेशकर्ता है। भारत में फिलहाल सात जगहों पर करीब दो दर्जन न्यूक्लियर रिएक्टर्स हैं, जिनकी कुल क्षमता 8780 MW है और ये देश की बिजली उत्पादन में सिर्फ 3% योगदान देते हैं।
सरकार इसे बढ़ाकर 13600 MW करने की योजना बना रही है, जबकि 2047 तक 100 GW न्यूक्लियर कैपेसिटी का लक्ष्य है। अडानी के अलावा टाटा पावर, रिलायंस इंडस्ट्रीज, JSW एनर्जी जैसे बड़े ग्रुप भी इस सेक्टर में रुचि दिखा रहे हैं। यह कदम न केवल क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देगा, बल्कि बड़े निवेश और रोजगार के अवसर पैदा करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि SMRs डेटा सेंटर्स और AI जैसे बढ़ते बिजली डिमांड वाले क्षेत्रों के लिए 24/7 कार्बन-फ्री पावर उपलब्ध कराएंगे। अडानी ग्रुप की यह एंट्री भारत की एनर्जी ट्रांजिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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