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मेरठ में फर्जी दस्तावेजों से रजिस्ट्री का जाल
मेरठ, 18 सितंबर 2025। Fraud: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में फर्जी रजिस्ट्री के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यहां फर्जी पैन कार्ड और आधार कार्ड के सहारे संपत्ति की रजिस्ट्री की जा रही है, जिससे आम लोगों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। हाल ही में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया, जिसमें राजस्थान के बाड़मेर जिले के रहने वालों ने 100 से अधिक फर्जी कंपनियां बनाकर 1000 करोड़ रुपये का जीएसटी फ्रॉड किया। ये फर्जी दस्तावेज न केवल टैक्स चोरी के लिए इस्तेमाल हो रहे, बल्कि रियल एस्टेट में भी संपत्ति हड़पने के लिए।
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मेरठ के सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में पिछले एक साल में दर्जनों ऐसी शिकायतें दर्ज हुई हैं, जहां खरीदारों को पता चला कि उनकी रजिस्ट्री फर्जी दस्तावेजों पर आधारित थी। फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह आधार और पैन कार्ड की कॉपी चुराकर या फर्जी बनाकर इस्तेमाल कर रहे हैं। एक मामले में, आरोपी रतन राम, ओमप्रकाश, हनुमान राम, बूढ़ाराम और भेराराम ने फर्जी आधार-पैन से जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवाकर फर्जी इनवॉइस जारी किए। इसी तरह, रियल एस्टेट में वे फर्जी आईडी से संपत्ति खरीद-बेच रहे हैं। मेरठ के एक निवासी ने बताया कि उनकी जमीन फर्जी आधार पर किसी अज्ञात व्यक्ति के नाम रजिस्टर हो गई, जिससे उन्हें लाखों का नुकसान हुआ।
विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल इंडिया के दौर में भी आधार की सत्यापन प्रक्रिया में ढिलाई से ये मामले बढ़े हैं। साइबर क्राइम यूनिट ने पाया कि ऑनलाइन वेबसाइट्स पर फर्जी आधार-पैन प्रिंटिंग सर्विसेज चल रही हैं, जो ग्राहकों की जानकारी चुराकर फ्रॉड करती हैं। STF ने इन पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और जांच में अन्य व्यापारियों, फाइनेंशियल मीडिएटर्स और जीएसटी कंसल्टेंट्स के लिंक मिल रहे हैं। मेरठ पुलिस ने सख्ती बरतते हुए रजिस्ट्री प्रक्रिया में आधार की बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दी है। डीएम ने कहा, “फर्जी दस्तावेजों पर रजिस्ट्री रोकने के लिए ड्राइव चलाई जा रही है।” हालांकि, चुनौतियां बरकरार हैं।
पिछले दो सालों में यूपी में 4454 ऐसे केस सामने आए, जिनसे 28,000 करोड़ का टैक्स चोरी हुआ। साइबर फ्रॉड में आधार का दुरुपयोग बढ़ा है, जैसे 2023 में यूपी गैंग ने 1200 सिम कार्ड फर्जी आधार से एक्टिवेट किए। केंद्र सरकार ने जीएसटी रजिस्ट्रेशन में बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन लागू किया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी से समस्या बनी हुई है। फर्जीवाड़े रोकने के लिए सरकार ने कदम उठाए हैं। आधार एक्ट 2016 के तहत फर्जी दस्तावेज बनाने पर 3 साल की सजा और 25,000 रुपये जुर्माना, जबकि कंपनियों पर 1 लाख तक। जीएसटी विभाग ने रिस्क-बेस्ड एनालिटिक्स से फर्जी फर्म्स की पहचान शुरू की।
मेरठ प्रशासन ने लोगों को सलाह दी कि आधार-पैन शेयर करने से पहले सावधानी बरतें, और किसी संदिग्ध रजिस्ट्री पर तुरंत शिकायत करें। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि डिजिटल वेरिफिकेशन ऐप्स का इस्तेमाल करें। इस फ्रॉड से न केवल सरकारी खजाना खाली हो रहा, बल्कि आम आदमी की मेहनत की कमाई पर डाका पड़ रहा। जागरूकता अभियान चलाकर ही इस काले कारोबार को रोका जा सकता है। मेरठ जैसे जिलों में बढ़ते मामले चेतावनी हैं कि सतर्कता ही सुरक्षा है।
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