नई दिल्ली, 15 दिसंबर 2025। Fake Cream Factory: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े अंतरराज्यीय नकली दवाओं के रैकेट का पर्दाफाश किया है। गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में मीरपुर हिंदू गांव (मीरपुर इलाका) में स्थित एक अवैध फैक्ट्री पर छापा मारकर पुलिस ने करीब 2.3 करोड़ रुपये कीमत की नकली मेडिकेटेड क्रीम, कच्चा माल, पैकिंग सामग्री और मशीनरी बरामद की।
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इस कार्रवाई में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। ये नकली क्रीम बेटनोवेट-सी, क्लोप-जी और स्किन-शाइन जैसी लोकप्रिय ब्रांडेड दवाओं की नकल थीं, जो त्वचा संक्रमण, एलर्जी और स्पोर्ट्स इंजरी के इलाज में इस्तेमाल होती हैं। पुलिस के अनुसार, यह रैकेट लंबे समय से चल रहा था और नकली दवाएं दिल्ली के सदर बाजार से होते हुए उत्तर भारत के कई राज्यों में सप्लाई की जा रही थीं।
गिरफ्तार आरोपी गौरव भगत (38 वर्ष, गाजियाबाद निवासी) और श्रीराम उर्फ विशाल गुप्ता (42 वर्ष, दिल्ली निवासी) हैं। जांच में पता चला कि फैक्ट्री बिना किसी ड्रग लाइसेंस या गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) सर्टिफिकेशन के चल रही थी, जो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट का गंभीर उल्लंघन है। मुख्य आरोपी गौरव भगत पहले एक दवा कंपनी के लिए सप्लाई का काम करता था।
इसी दौरान उसे नकली दवाएं बनाने का आइडिया आया। वह पढ़ा-लिखा नहीं है, लेकिन यूट्यूब वीडियो देखकर उसने बेटनोवेट-सी और क्लोप-जी जैसी क्रीम बनाने की विधि सीख ली। छह साल पहले उसने अपने साथी के साथ मिलकर यह अवैध धंधा शुरू किया। उन्होंने दिल्ली के आनंद पर्वत इलाके से मशीनें खरीदीं और अलग-अलग राज्यों से कच्चा माल मंगवाकर उत्पादन शुरू कर दिया।
पिछले तीन महीनों से यह फैक्ट्री लोनी के मीरपुर में किराए के मकान में चल रही थी। एक ट्यूब की लागत मात्र 1.5 से 2 रुपये आती थी, जिसे होलसेल में 15 रुपये तक बेचा जाता था, जबकि बाजार में असली क्रीम 70-100 रुपये में बिकती है। इस कीमत के अंतर से आरोपी मोटा मुनाफा कमा रहे थे। बरामद सामान में 1200 ट्यूब नकली बेटनोवेट-सी, 2700 ट्यूब क्लोप-जी, 3700 ट्यूब स्किन-शाइन, 22,000 खाली ट्यूब, 350 किलो से अधिक अर्ध-तैयार क्रीम और रसायन शामिल हैं।
ड्रग इंस्पेक्टरों और संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों ने मौके पर जांच कर पुष्टि की कि ये दवाएं पूरी तरह नकली हैं और मूल कंपनियों द्वारा निर्मित नहीं की गईं। इन नकली दवाओं का इस्तेमाल लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता था। पुलिस अब आरोपियों की संपत्तियों की जांच कर रही है और रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में छापेमारी जारी है। यह कार्रवाई सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुके नकली दवा कारोबार पर करारा प्रहार है।
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