लखनऊ, 2 नवंबर 2025। Fake Citizenship Racket: उत्तर प्रदेश की नेपाल सीमा फिर से सुरक्षा के मोर्चे पर चिंता का विषय बनी हुई है। बहराइच, श्रावस्ती और बलरामपुर के बाद अब गोंडा जिले में एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का गिरोह फर्जी दस्तावेजों के जरिए नेपाली नागरिकों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का काला कारोबार चला रहा था। इस नेटवर्क के जाल महराजगंज, सिद्धार्थनगर, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और बलरामपुर जैसे जिलों तक फैले हुए हैं, जो सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ और संसाधनों के दोहन को बढ़ावा दे रहे थे।
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विशेष कार्य बल (STF) की सतर्कता से शुक्रवार को इस गिरोह के पांच प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया, जिससे बॉर्डर सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों ने ‘नागरिकता पैकेज’ का पूरा सेट तैयार किया था, जिसमें मात्र 20 से 25 हजार रुपये में जन्म प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र, आधार कार्ड और पैन कार्ड शामिल थे। इन फर्जी दस्तावेजों की मदद से नेपाली घुसपैठिए न केवल भारत में जमीनें खरीद रहे थे, बल्कि बैंक खाते खुलवाकर वित्तीय लेन-देन भी कर रहे थे।
STF के अनुसार, बीते दिनों नेपाल से सटे सात जिलों—बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत—की सीमावर्ती तहसीलों में दर्जनों रजिस्ट्री इसी तरह के फर्जी प्रमाणपत्रों पर आधारित पाई गईं। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही थी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा पैदा हो रहा था।
नेपाल बॉर्डर पर लंबे समय तक तैनात रहे पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी संतोष सिंह ने बताया कि पिछले महीने ही बहराइच की नानापारा तहसील, श्रावस्ती की भिनगा, बलरामपुर की उतरौला और तुलसीपुर, सिद्धार्थनगर की डुमरियागंज, महराजगंज की नौतनवा व निचलौल, तथा लखीमपुर खीरी की पलिया कलां व गोला गोकर्णनाथ तहसीलों में गहन जांच के दौरान नेपाली नागरिकों द्वारा फर्जी दस्तावेजों पर संपत्ति खरीदने के कई मामले सामने आए। श्रावस्ती के एक केस में तो पुलिस ने मुकदमा भी दर्ज कर लिया था, जिसमें नेपाली मूल के व्यक्ति ने फर्जी आधार कार्ड से लाखों की जमीन हड़प ली थी।
संतोष सिंह ने चेतावनी दी कि बहराइच और महराजगंज जिले सबसे अधिक संवेदनशील हैं, जहां घुसपैठ के प्रयास रोजाना हो रहे हैं। STF ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों में हरदोई के अहिरौली ग्राम पंचायत अधिकारी लाल बिहारी पाल (सुभाष नगर भोलाखेड़ा, लखनऊ निवासी), तथा गोंडा के रवि वर्मा (मास्टरमाइंड, जो पहले भी जन्म प्रमाणपत्र जालसाजी के मामले में जेल जा चुका है), सोनू वर्मा, बंशराज वर्मा और सत्यरोहन वर्मा शामिल हैं।
ये लोग फर्जी वेबसाइट्स, सॉफ्टवेयर और सरकारी पोर्टलों की नकल करके जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार कर रहे थे। इनका इस्तेमाल फर्जी बैनामे, वसीयतनामों और अन्य कानूनी दस्तावेजों में भी किया जा रहा था। STF के डिप्टी एसपी सुधांशु शेखर ने बताया, “पूरे नेटवर्क की गहन जांच चल रही है। हम फर्जी दस्तावेजों के जरिए की गई सभी रजिस्ट्री और बैंक ट्रांजेक्शन की पड़ताल कर रहे हैं।
जांच का दायरा अन्य सीमावर्ती जिलों तक विस्तारित कर दिया गया है, ताकि इस साजिश का पूरा खुलासा हो सके।” एक्सपर्ट्स का कहना है कि नेपाल-भारत सीमा पर डिजिटल निगरानी और स्थानीय प्रशासन की सतर्कता बढ़ाने की जरूरत है। घुसपैठिए न केवल आर्थिक लाभ उठा रहे हैं, बल्कि वोट बैंक और अन्य सामाजिक मुद्दों को भी प्रभावित कर रहे हैं।
STF की इस सफलता से स्थानीय निवासियों में राहत है, लेकिन लंबे समय के लिए सख्त कानून और अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और विकराल रूप धारण कर सकती है, जो उत्तर प्रदेश की सुरक्षा को गंभीर चुनौती देगी। कुल मिलाकर, यह घटना सीमा सुरक्षा पर पुनर्विचार की मांग करती है।
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