नई दिल्ली, 27 दिसंबर 2025। Experts Estimates: राजधानी दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से निजात पाने के लिए मौजूदा उपाय अपर्याप्त साबित हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को वास्तव में कम करने के लिए कम से कम 8-10 लाख करोड़ रुपये के बड़े निवेश की आवश्यकता है। यह राशि इलेक्ट्रिक वाहनों के व्यापक ढांचे, सड़कों के पुनर्निर्माण, धूल नियंत्रण और सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण जैसे दीर्घकालिक बदलावों के लिए जरूरी है।
इसे भी पढ़ें- Delhi Assembly Winter Session: पूरी तरह डिजिटल होगा सदन, प्रदूषण-सफाई और CAG रिपोर्टों पर हंगामे के आसार
बिना सरकारी सब्सिडी, अनुदान और निजी भागीदारी के यह बड़ा परिवर्तन मुश्किल है। सर्दियों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक हो जाता है, जिससे स्कूल बंद होने से लेकर वाहन प्रतिबंध तक के कदम उठाए जाते हैं। हालांकि, ये मौसमी कार्रवाइयां हैं। समस्या साल भर बनी रहती है, लेकिन सर्दियों में यह चरम पर पहुंच जाती है। एक पूर्व पर्यावरण सचिव के अनुसार, समस्या और समाधान दोनों स्पष्ट हैं, लेकिन कार्यान्वयन में कमी है।

बीजिंग जैसे शहरों ने प्रदूषण नियंत्रण पर अरबों डॉलर खर्च किए हैं, जबकि लंदन ने अल्ट्रा लो एमिशन जोन के लिए बड़ी राशि निवेश की है। दिल्ली-एनसीआर के लिए भी ऐसा ही निवेश जरूरी है।
प्रदूषण कम करने का प्रस्तावित प्लान
प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक व्यापक प्लान की जरूरत है, जिसमें निम्नलिखित कदम शामिल हैं।
- सड़कों का पुनर्निर्माण और उन्हें पूरी तरह पक्का करना, ताकि धूल उड़ने से रोका जा सके।
- इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह इलेक्ट्रिक बनाना।
- केवल उच्च गुणवत्ता वाले ईंधन और सख्त उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों का उपयोग, इसके लिए सरकारी सब्सिडी और प्रोत्साहन आवश्यक।
- उद्योगों, खासकर छोटे प्रतिष्ठानों को बेहतर तकनीक अपनाने के लिए मार्गदर्शन और सहायता।
- धूल नियंत्रण के लिए मैकेनिकल स्वीपिंग, एंटी-स्मॉग गन और वॉटर स्प्रिंकलर का बड़े पैमाने पर उपयोग।
- पुराने प्रदूषणकारी वाहनों को हटाना और शेयर्ड मोबिलिटी को बढ़ावा देना।
ये उपाय कई एजेंसियों की भागीदारी मांगते हैं, जिससे समन्वय और रसद संबंधी चुनौतियां पैदा होती हैं। दिल्ली सरकार इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा बढ़ा रही है और धूल नियंत्रण पर फोकस कर रही है, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर समन्वय की कमी बनी हुई है।
CAQM की स्थापना और चुनौतियां
2020 में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बीच केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की स्थापना की। बाद में इसे कानून का रूप दिया गया। CAQM दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं का समन्वय करता है और ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू करता है।हालांकि, CAQM को पर्याप्त अधिकार, प्रशिक्षित कर्मियों और कार्यबल की कमी का सामना करना पड़ रहा है। कार्यान्वयन तंत्र भी अपर्याप्त है।
इससे मौसमी कार्रवाइयां ही प्रमुख रह जाती हैं, जैसे GRAP के विभिन्न चरणों में वाहन प्रतिबंध, निर्माण रोक और डीजल जनरेटर पर बैन। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी समाधान के लिए CAQM को मजबूत करना और बड़ा निवेश जरूरी है। दिल्ली-एनसीआर की हवा को साफ करने के लिए ज्ञात समाधान हैं, लेकिन इच्छाशक्ति, फंडिंग और समन्वय की कमी बाधा बनी हुई है।
अगर 8-10 लाख करोड़ का निवेश हो, तो इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योग अपग्रेडेशन से प्रदूषण में निर्णायक कमी आ सकती है। यह न केवल स्वास्थ्य बचाएगा, बल्कि आर्थिक नुकसान भी रोकेगा।
इसे भी पढ़ें- Delhi Pollution: दिल्ली-NCR में प्रदूषण का कहर, AQI 400 पार, अगले कुछ दिनों तक राहत के आसार नहीं








