लखनऊ, 27 नवंबर 2025। ED Raid: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार 26 नवंबर 2025 को एक बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चलाया, जिसमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत 10 राज्यों के 15 ठिकानों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन किए गए। यह कार्रवाई मेडिकल कॉलेजों को लेकर नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के अधिकारियों को दी गई रिश्वत के आरोपों से जुड़ी है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई यह जांच प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत चल रही है।
ED के अधिकारियों ने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न स्थानों पर दबिश दी। इनमें सात प्रमुख मेडिकल कॉलेजों के परिसर और कुछ निजी व्यक्तियों के ठिकाने शामिल हैं, जो CBI के आरोपी सूची में नामित हैं।आरोपों के अनुसार, मेडिकल कॉलेजों के प्रमुख प्रबंधकों और मध्यस्थों ने NMC के अधिकारियों को लाखों-करोड़ों रुपये की रिश्वत दी ताकि कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट की गोपनीय जानकारी लीक हो सके।
इस जानकारी का इस्तेमाल कर कॉलेज प्रबंधन ने मानकों को तोड़-मरोड़कर मैनिपुलेट किया और नए अकादमिक कोर्स चलाने की मंजूरी हासिल की। ED के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि छापेमारियों के दौरान दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड, नकदी और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई है। जांच में यह सामने आया है कि रिश्वत का यह जाल 2023 से सक्रिय था, जिसमें कई निजी मेडिकल संस्थानों ने NMC के इंस्पेक्शन को ‘पास’ कराने के लिए सिस्टमेटिक तरीके से भ्रष्टाचार किया।
दिल्ली और यूपी में सबसे अधिक ठिकाने कवर किए गए, जहां मेडिकल एजुकेशन के हॉटस्पॉट माने जाने वाले क्षेत्रों पर फोकस रहा।यह मामला मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करता है। CBI की प्रारंभिक FIR में 12 से अधिक आरोपी नामित हैं, जिनमें NMC के दो पूर्व अधिकारी, तीन मध्यस्थ और कई कॉलेज ट्रस्टी शामिल हैं। ED का कहना है कि रिश्वत की राशि 50 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है, जो मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए सफेद की गई।
छापेमारियों के दौरान ED टीमों को भारी सुरक्षा के बीच काम करना पड़ा, क्योंकि कुछ ठिकानों पर विरोध की कोशिशें हुईं। एक मेडिकल कॉलेज प्रबंधक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यह राजनीतिक साजिश है, लेकिन सच्चाई सामने आएगी।” हालांकि, ED ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई तथ्यों पर आधारित है और कोई राजनीतिक दबाव नहीं है।इस अभियान से मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि NMC जैसे नियामक निकायों में आंतरिक सुधार जरूरी हैं ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे। ED ने जांच जारी रखते हुए आरोपी व्यक्तियों को समन जारी करने की तैयारी की है।
यदि आरोप साबित हुए, तो इससे मेडिकल शिक्षा क्षेत्र में बड़ा झटका लगेगा। सरकार ने स्वास्थ्य मंत्रालय को निर्देश दिए हैं कि ऐसी अनियमितताओं की स्वतंत्र ऑडिट कराई जाए। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्र सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा है। मेडिकल कॉलेजों के छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी लें। क्या यह छापेमारी भ्रष्टाचार के पनपने वाली जड़ों को काट पाएगी? आने वाले दिनों में जांच के और खुलासे हो सकते हैं।
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