नई दिल्ली। DGCA Action: भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के हालिया फ्लाइट कैंसिलेशन संकट के बीच नागरिक उड्डयन नियामक डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने शुक्रवार को चार फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर्स को नौकरी से निकाल दिया। ये इंस्पेक्टर्स इंडिगो की नए पायलट रेस्ट नियमों (फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन – एफडीटीएल) के लिए तैयारियों की निगरानी करने के जिम्मेदार थे, लेकिन उनकी लापरवाही से कंपनी में पायलटों की भारी कमी हो गई, जिसके चलते 5,000 से अधिक उड़ानें रद्द हुईं और लाखों यात्री फंस गए।
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इन इंस्पेक्टर्स के नाम ऋषि राज चटर्जी, सीमा झमनानी, अनिल कुमार पोखरियाल और प्रियम कौशिक हैं। डीजीसीए के आंतरिक आदेश के अनुसार, इन्हें पांच साल के कॉन्ट्रैक्ट के तहत नियुक्त किया गया था। ये सक्रिय पायलट होते हैं, जो ऑडिटर के रूप में काम करते हैं और इस दौरान किसी एयरलाइन के लिए उड़ान भरने पर प्रतिबंधित रहते हैं। इनकी जिम्मेदारी एयरलाइंस की सुरक्षा, पायलट ट्रेनिंग और संचालन अनुपालन की जांच करना होता है। समय-समय पर ये निरीक्षण करते हैं कि कंपनियां सभी नियमों का पालन कर रही हैं या नहीं।
इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी 65% से अधिक है, लेकिन नए एफडीटीएल नियमों (जो 1 नवंबर 2025 से चरणबद्ध लागू हुए) के तहत पायलटों को अधिक आराम समय मिलने से उनकी जरूरत बढ़ गई। कंपनी पर्याप्त भर्ती न कर पाई, जिससे दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई समेत सभी प्रमुख हवाई अड्डों पर हाहाकार मच गया। सरकार ने इंडिगो को 10% उड़ानें कम करने का आदेश दिया, जबकि पहले 5% की सिफारिश की गई थी।अब एविएशन विशेषज्ञ डीजीसीए की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
एक अधिकारी ने कहा, “डीजीसीए को एयरलाइंस की क्षमता, जैसे पायलटों की संख्या, की जांच करनी चाहिए, ताकि शेड्यूल बरकरार रहे। इंस्पेक्टर्स ने इंडिगो की तैयारियों का ऑडिट किया था, लेकिन यह कैसे चूक गया कि सबसे बड़ी एयरलाइन के पास पर्याप्त पायलट नहीं हैं।” डीजीसीए सीधे नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू को रिपोर्ट करता है, जो एयर इंडिया दुर्घटना के बाद एयरलाइंस के साथ मासिक बैठकें कर रहे हैं।
एक अन्य अधिकारी ने आश्चर्य जताया कि इतना बड़ा मुद्दा मंत्री के ध्यान से कैसे छूट गया। डीजीसीए ने संकट गहराने पर कदम उठाए हैं। इंडिगो के गुरुग्राम मुख्यालय में दो अधिकारियों को तैनात किया गया है, जो फ्लीट तैनाती, क्रू उपयोग, ट्रेनिंग और अनप्लांड लीव की निगरानी करेंगे। चार सदस्यीय जांच पैनल (जॉइंट डीजी संजय ब्रह्मणे, डिप्टी डीजी अमित गुप्ता, सीनियर इंस्पेक्टर कपिल मंगलिक और एफओआई लोकेश रामपाल) बनाया गया है, जो मैनपावर प्लानिंग, रोस्टरिंग और नए नियमों की तैयारी की जांच करेगा।
इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स को शुक्रवार दोपहर पैनल के समक्ष पेश होने को कहा गया है। कंपनी ने प्रभावित यात्रियों को 10,000 रुपये के वाउचर और मुआवजे की घोषणा की है। यह कार्रवाई न केवल इंडिगो पर, बल्कि पूरे सेक्टर पर सबक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पायलट भर्ती तेज करने और विदेशी क्रू को मंजूरी देने से संकट टाला जा सकता था। डीजीसीए ने इंडिगो को फरवरी 2026 तक छूट मांगने पर विचार करने को कहा है, लेकिन सख्त निगरानी जारी रहेगी।
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