नई दिल्ली, 12 दिसंबर 2025। Delhi Smog: लोकसभा में शुक्रवार (12 दिसंबर 2025) को विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने वायु प्रदूषण का मुद्दा उठाकर सदन में एक दुर्लभ सकारात्मक माहौल बनाया। उन्होंने केंद्र सरकार से दोषारोपण छोड़कर भविष्योन्मुखी चर्चा की अपील की और प्रदूषण से निपटने के लिए अगले 4-5 सालों का रोडमैप मांगा।
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राहुल ने कहा कि देश के प्रमुख शहर जहरीली हवा की चादर में लिपटे हैं, लाखों बच्चे फेफड़ों की बीमारियों से जूझ रहे हैं, उनका भविष्य खतरे में है, लोग कैंसर का शिकार हो रहे हैं और बुजुर्गों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। राहुल गांधी ने सदन में खड़े होकर कहा, “यह कोई वैचारिक मुद्दा नहीं है। मुझे पूरा यकीन है कि सरकार और हम सब इस पर सहमत हैं। हर कोई मानता है कि वायु प्रदूषण से हमारे लोगों को हो रहा नुकसान एक गंभीर समस्या है और हम इसमें सहयोग करना चाहते हैं।”
उन्होंने सुझाव दिया कि चर्चा को इस तरह आगे बढ़ाया जाए कि हम एक-दूसरे पर आरोप न लगाएं, बल्कि भारत की जनता के भविष्य के लिए क्या कदम उठाने हैं, इस पर फोकस करें। राहुल ने कहा कि विशेषज्ञों की राय लेकर हर शहर के लिए समयबद्ध प्लान बनाया जाए, ताकि अगले 5-10 सालों में इस समस्या का समाधान निकाला जा सके। जवाब में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।
लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमिटी समय आवंटित करेगी। यह दुर्लभ मौका था जब विपक्ष और सरकार एक गैर-राजनीतिक मुद्दे पर सहमति दिखी।लोकसभा के बाहर मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने दोहराया कि दिल्ली और बड़े शहरों का प्रदूषण बच्चों का भविष्य खराब कर रहा है। लोग कैंसर और अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं।
उन्होंने कहा, “यह ऐसा विषय है जिसमें सभी पार्टियां एकमत हो सकती हैं। हमें सदन में भविष्य की बात करनी चाहिए, समस्या का हल कैसे निकाला जाए, इस पर चर्चा करनी चाहिए। विशेषज्ञों की राय लेंगे और देश को दिखाएंगे कि हम प्रदूषण पर एक साथ काम कर सकते हैं। दिल्ली में इन दिनों वायु प्रदूषण ‘वेरी पुअर’ कैटेगरी में बना हुआ है, कई इलाकों में AQI 300-400 के पार पहुंच रहा है।
स्मॉग की मोटी चादर से विजिबिलिटी कम हो रही है, अस्पतालों में सांस की बीमारियों के मरीज बढ़ रहे हैं। राहुल का यह कदम ऐसे समय आया है जब शीत सत्र में प्रदूषण पर चर्चा की मांग पहले से हो रही थी। विपक्ष के इस सकारात्मक रुख से उम्मीद है कि सदन में गहन बहस होगी और ठोस कदम उठाए जाएंगे।
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