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Delhi School Fee Act: दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस पर लगाम, नया कानून लागू, अभिभावकों को राहत

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Delhi School Fee Act

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नई दिल्ली, 12 दिसंबर 2025। Delhi School Fee Act: दिल्ली सरकार ने लंबे समय से चली आ रही निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर कड़ा प्रहार करते हुए ‘दिल्ली स्कूल एजुकेशन (फीस निर्धारण और नियमन) एक्ट, 2025’ को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना द्वारा गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद यह कानून तत्काल प्रभावी हो गया है। इस नए कानून का उद्देश्य निजी अनएडेड स्कूलों (जिनकी संख्या दिल्ली में 1,500 से अधिक है) में पारदर्शिता लाना, फीस संरचना को नियंत्रित करना और अभिभावकों को आर्थिक बोझ से मुक्ति दिलाना है।

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शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने इसे ‘अभिभावक-केंद्रित सुधार’ बताते हुए कहा कि यह विधेयक 65 दिनों में तैयार कर गुड गवर्नेंस का उदाहरण पेश किया गया है।पिछले एक दशक से मध्यम वर्गीय परिवार निजी स्कूलों की मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने की शिकायतें करते रहे हैं। स्कूल बिना किसी औचित्य के वार्षिक फीस में 10-20% की वृद्धि कर देते थे, साथ ही रजिस्ट्रेशन, कैपिटेशन या डोनेशन के नाम पर अतिरिक्त वसूली करते थे। अब यह सब बंद। कानून के तहत स्कूलों को फीस वृद्धि से पहले सरकारी अनुमति लेनी अनिवार्य होगी।

हर फीस हेड- जैसे ट्यूशन फीस, डेवलपमेंट फीस, लैब चार्ज आदि को अलग-अलग स्पष्ट रूप से दर्शाना होगा। बिना नोटिस या मंजूरी के कोई अतिरिक्त शुल्क वसूल नहीं किया जा सकेगा। उल्लंघन पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और मान्यता रद्द होने का प्रावधान है। कानून में तीन स्तरीय निगरानी व्यवस्था की व्यवस्था की गई है। सबसे पहले स्कूल स्तर पर फीस रेगुलेशन कमेटी बनेगी, जिसमें 50% सदस्य अभिभावक होंगे।

यह कमेटी फीस निर्धारण में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी। यदि विवाद हो, तो जिला फीस अपीलेट कमेटी में शिकायत दर्ज की जा सकेगी, लेकिन इसके लिए कम से कम 15% अभिभावकों का समर्थन जरूरी होगा। इससे झूठी शिकायतों पर रोक लगेगी। अपीलेट कमेटी 45 दिनों में फैसला लेगी, जो तीन साल तक बाध्यकारी रहेगा। यदि समय पर निर्णय न हो, तो मामला स्वतः रिवीजन कमेटी के पास चला जाएगा।

रिवीजन कमेटी का फैसला अंतिम होगा।इस कानून से दिल्ली के 16 लाख से अधिक छात्रों और उनके परिवारों को राहत मिलेगी। अभिभावक संगठनों ने इसे स्वागतयोग्य कदम बताया है। हालांकि, स्कूल एसोसिएशन ने फीस वृद्धि पर सीमित छूट की मांग की है, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित न हो। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फीस वृद्धि केवल वास्तविक खर्चों के आधार पर ही मंजूर होगी। कुल मिलाकर, यह कानून शिक्षा को सस्ता, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। अभिभावक अब जिला शिक्षा अधिकारी के पास आसानी से शिकायत कर सकेंगे।

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