नई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2025। Delhi School Education: दिल्ली सरकार ने सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में एक ऐतिहासिक बदलाव की घोषणा की है। अब कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान के बारे में पढ़ाया जाएगा। यह नया कदम ‘राष्ट्रनीति’ नामक विशेष शिक्षा कार्यक्रम के तहत उठाया गया है, जिसका उद्देश्य छात्रों में सामाजिक चेतना, नैतिक शासन और राष्ट्रीय गौरव की भावना जगाना है।
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शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने मंगलवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम छात्रों को लोकतंत्र, शासन और सक्रिय नागरिकता का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करेगा।’राष्ट्रनीति’ कार्यक्रम का शुभारंभ 18 सितंबर को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भारत मंडपम में ‘नमो विद्या उत्सव’ के दौरान किया। यह तीन नए पाठ्यक्रमों में से एक है, जो मौलिक कर्तव्यों और नागरिक जागरूकता पर केंद्रित है। पाठ्यक्रम में आरएसएस पर एक समर्पित अध्याय शामिल किया गया है, जो संगठन की स्थापना से लेकर इसके सामाजिक योगदान तक की पूरी कहानी बयां करेगा।
1925 में महाराष्ट्र के नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित आरएसएस की विचारधारा—सांस्कृतिक जागरूकता, अनुशासन, सेवा भाव और सामाजिक उत्तरदायित्व पर विशेष जोर दिया जाएगा। छात्रों को बताया जाएगा कि कैसे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे नेता संगठन से जुड़े रहे।इसके अलावा, स्वतंत्रता संग्राम में आरएसएस की भूमिका को रेखांकित किया जाएगा। स्वयंसेवकों के बलिदान और योगदान को उजागर करते हुए, पाठ्यक्रम वीर सावरकर, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, सरदार वल्लभभाई पटेल तथा नेताजी सुभाषचंद्र बोस जैसे नायकों के जीवन और संघर्ष पर विस्तृत चर्चा करेगा।
एक अलग खंड गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित होगा, जो अक्सर इतिहास की किताबों से गायब रह जाते हैं। संगठन के सामाजिक कार्यों पर भी प्रकाश डाला जाएगा, जैसे प्राकृतिक आपदाओं में राहत केदारनाथ त्रासदी, बिहार बाढ़ और भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान। कोरोना महामारी के दौरान रक्तदान शिविर, भोजन वितरण और चिकित्सा सहायता जैसे प्रयासों का जिक्र होगा। शिक्षा मंत्री ने कहा, “इस अध्याय से छात्रों में नागरिक कर्तव्यों की समझ विकसित होगी और संगठन के बारे में फैली भ्रांतियां दूर होंगी।
“कार्यान्वयन की तैयारी जोरों पर है। शिक्षा निदेशालय ने शिक्षक पुस्तिकाएं तैयार कर ली हैं, जबकि एससीईआरटी में प्रशिक्षण सत्र चल रहे हैं। हालांकि, अभी यह तय होना बाकी है कि किन कक्षाओं में यह अध्याय अनिवार्य होगा। यह पहल आरएसएस के स्थापना शताब्दी वर्ष के संदर्भ में उठाई गई है, जो छात्रों को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे युवा पीढ़ी में राष्ट्रीय एकता और सेवा भाव मजबूत होगा। लेकिन कुछ आलोचक इसे राजनीतिक प्रभाव की कोशिश बता रहे हैं, हालांकि सरकार इसे शैक्षिक सुधार का हिस्सा बताती है। कुल मिलाकर, ‘राष्ट्रनीति’ दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देगी, जहां इतिहास केवल तथ्य नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
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