नई दिल्ली 22 दिसंबर 2025। Delhi Pollution: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने का बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को घोषणा की कि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए दिल्ली मेट्रो के नेटवर्क का विस्तार और लास्ट माइल कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी जाएगी।
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सरकार का मानना है कि निजी वाहनों पर निर्भरता कम करके ही प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान संभव है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) सहित विभिन्न शोध और सरकारी स्रोतों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का प्रमुख कारण वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन है। इसे नियंत्रित करने के लिए मजबूत सार्वजनिक परिवहन जरूरी है।
उन्होंने पिछली सरकारों पर तंज कसते हुए कहा कि यदि पूर्ववर्ती सरकारों ने परिवहन व्यवस्था पर गंभीरता दिखाई होती, तो आज दिल्ली को इतने गंभीर प्रदूषण का सामना नहीं करना पड़ता। वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में परिवहन विभाग के लिए बड़ा प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि परिवहन विभाग को 9,110 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष के 5,702 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत अधिक है।
इस बढ़ोतरी से दिल्ली मेट्रो की चल रही परियोजनाओं में किसी तरह की रुकावट नहीं आएगी। विशेष रूप से मेट्रो विस्तार के लिए 2,929 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जबकि पिछले साल यह राशि मात्र 500 करोड़ रुपये के आसपास थी यानी करीब छह गुना वृद्धि। सरकार दिल्ली मेट्रो की पुरानी देनदारियों का भी भुगतान कर रही है, जो पिछली सरकारों ने छोड़ी थीं।
फेज-I, II और III की करीब 2,700 करोड़ रुपये की बकाया राशि का निपटान किया जा रहा है। इसके अलावा, एमआरटीएस परियोजना के लिए दिल्ली सरकार 3,386.18 करोड़ रुपये का वित्तीय भार खुद वहन कर रही है। चालू वित्त वर्ष में 940 करोड़ रुपये पहले ही जारी हो चुके हैं, जबकि 336 करोड़ रुपये की अगली किस्त प्रक्रिया में है।मुख्यमंत्री का संकल्प है कि मेट्रो नेटवर्क को इतना व्यापक और मजबूत बनाया जाए कि लोगों को लास्ट माइल कनेक्टिविटी तक निजी वाहन निकालने की जरूरत न पड़े। इससे न केवल ट्रैफिक जाम कम होगा, बल्कि वाहनों से होने वाला प्रदूषण भी काफी हद तक नियंत्रित हो सकेगा।
रेखा गुप्ता ने लोगों से अपील की कि जब तक नागरिक निजी वाहनों को छोड़कर सार्वजनिक परिवहन की ओर रुख नहीं करेंगे, तब तक प्रदूषण की समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी। यह कदम दिल्ली की हवा को सांस लेने लायक बनाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। सरकार की यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नेट जीरो एमिशन’ विजन से भी जुड़ी हुई है।
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