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दिल्ली पुलिस ने पकड़ा 27 लाख की ऑनलाइन ठगी का मास्टरमाइंड, फर्जी क्रिप्टो स्कीम से लूटे लाखों

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Delhi Police

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नई दिल्ली, 1 सितंबर 2025। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने एक बड़े ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए इसके मास्टरमाइंड सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह फर्जी क्रिप्टोकरेंसी योजनाओं के जरिए लोगों को झूठे निवेश के वादे करके लाखों रुपये की ठगी करता था।
दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (साइबर सेल) आदित्य गौतम ने बताया कि यह मामला तब सामने आया, जब महेंद्रु एन्क्लेव के एक 47 वर्षीय स्टेशनरी दुकानदार ने शिकायत दर्ज की कि उसे फर्जी क्रिप्टो निवेश मंच के जरिए 27 लाख रुपये का नुकसान हुआ। शिकायतकर्ता को उच्च रिटर्न का लालच देकर ठगा गया था।
जांच के दौरान पुलिस ने करोल बाग के एक बैंक में एक म्यूल कॉर्पोरेट खाते की पहचान की, जिसमें 17 फरवरी 2025 को ठगी की राशि में से 10 लाख रुपये जमा किए गए थे। यह खाता राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर पहले से ही नौ शिकायतों से जुड़ा हुआ था। खाताधारक, 42 वर्षीय कृष्ण कुमार उर्फ मोनू, जो पहाड़गंज का निवासी है, लगातार पते और मोबाइल नंबर बदलकर पुलिस से बच रहा था।
पुलिस ने तकनीकी निगरानी और सूचना के आधार पर उसे और उसके सहयोगी इरफान को पहाड़गंज से गिरफ्तार किया। इरफान खाताधारकों की निगरानी करता था, जबकि एक अन्य सहयोगी अरविंद साइबर ठगों के साथ संपर्क में रहता था, जो म्यूल खातों के जरिए पैसे का हेरफेर करता था। अरविंद पहले से ही साइबर वेस्ट पुलिस स्टेशन में एक अन्य मामले में हिरासत में है।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह लोगों को फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया समूहों के जरिए लुभाता था। शिकायतकर्ता को एक मैसेजिंग समूह में जोड़ा गया, जहां उसे निवेश के लिए प्रलोभन दिया गया। उसने एक फर्जी वेबसाइट पर खाता खोला और कई खातों में 27 लाख रुपये ट्रांसफर किए। जब उसे ठगी का अहसास हुआ, तब उसने एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज की। पुलिस ने इस मामले में चार मोबाइल फोन, सिम कार्ड, चेकबुक और पासबुक बरामद किए हैं, जो सात अलग-अलग बैंकों से जुड़े हैं।
जांच में पता चला कि यह गिरोह सुनियोजित तरीके से काम करता था और देशभर में कई लोगों को निशाना बनाया।यह गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस की साइबर अपराध के खिलाफ चल रही मुहिम का हिस्सा है। डीसीपी गौतम ने कहा कि अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है, और इस रैकेट के पूरे नेटवर्क को उजागर करने के लिए जांच तेज कर दी गई है। यह घटना डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों और लोगों को जागरूक करने की जरूरत को रेखांकित करती है।

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