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Delhi Fire Safety: दिल्ली में गोवा जैसी त्रासदी का खतरा, 3000+ बार-क्लब बिना फायर NOC के, गुरुग्राम-नोएडा में भी लापरवाही…

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Bars in Delhi

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नई दिल्ली, 9 दिसंबर 2025। Delhi Fire Safety:  गोवा के अर्पोरा में ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नाइटक्लब में 6-7 दिसंबर 2025 की आधी रात को लगी आग ने 25 लोगों की जान ले ली, जिसमें 5 पर्यटक शामिल थे। आग इलेक्ट्रिक पटाखों के फटने से लगी, जो क्लब में बिना अनुमति के इस्तेमाल हो रहे थे। क्लब के पास फायर NOC नहीं था, आपातकालीन निकासी के रास्ते अवरुद्ध थे, और निर्माण अवैध था।

इस घटना ने दिल्ली-एनसीआर के बार-क्लब संस्कृति पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां 90 वर्ग मीटर से बड़े स्थानों पर फायर NOC अनिवार्य होने के बावजूद 3000 से ज्यादा प्रतिष्ठान बिना प्रमाण-पत्र के चल रहे हैं। दिल्ली फायर सर्विसेज (DFS) के आंकड़ों के अनुसार, केवल 38 क्लब और 52 होटल्स के पास वैध NOC है, जो कुल स्थानों का महज 2% है।

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विशेषज्ञ इसे “आपदा की रेसिपी” बता रहे हैं। दिल्ली फायर सर्विसेज एक्ट 2007, रूल्स 2010, नेशनल बिल्डिंग कोड 2016 और यूनिफाइड बिल्डिंग बाय-लॉज के तहत 90 वर्ग मीटर से बड़े बार-क्लब को फायर NOC लेना जरूरी है। इसमें दो अलग-अलग प्रवेश-निकास द्वार, दो सीढ़ियां, कार्यशील फायर एक्सटिंग्विशर, स्प्रिंकलर सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर और इमरजेंसी लाइटिंग शामिल हैं। लेकिन अधिकांश स्थानों पर ये मानक धज्जियां उड़ाए जा रहे हैं। कनॉट प्लेस में 135 और खान मार्केट में 35 बार हैं, जहां भीड़ सबसे ज्यादा होती है।

Delhi Fire Safety:

लापरवाही के प्रमुख कारण ओवरक्राउडिंग: 48 क्षमता वाले बार में 80-100 लोग ठूंस दिए जाते हैं। 100 क्षमता वाले में 150+। कागजों पर छोटा एरिया दिखाकर NOC से बचा जाता है।

अवैध संचालन: रिहायशी और अनधिकृत कॉलोनियों में बार चल रहे हैं, जबकि नियम केवल व्यावसायिक क्षेत्रों की अनुमति देते हैं। MCD, NDMC और दिल्ली कैंट बोर्ड के हेल्थ ट्रेड लाइसेंस पर चलते हैं, लेकिन पुलिस और यातायात मंजूरी अब जरूरी नहीं।

सुरक्षा उल्लंघन: निकास द्वार लॉक या अवरुद्ध, तेज संगीत बिना अनुमति (डेसिबल लिमिट), रात 1 बजे बंद होने वाले बार सुबह 4 बजे तक खुले। किचन में LPG सिलेंडर, खराब वायरिंग और खराब वेंटिलेशन आम।

इलेक्ट्रिक पटाखे: गोवा हादसे जैसा खतरा। ये ऑर्डर पर बनते हैं, बिना निगरानी के इस्तेमाल। दिल्ली में भी पार्टीज में चलन बढ़ा।

मिलीभगत: थाना पुलिस, दमकल, आबकारी, नगर निगम और DPCC की “मेहरबानी” से धंधा फल-फूल रहा।

सालाना शुल्क: 48 क्षमता वाले बार को MCD को 50 हजार, आबकारी को 15 लाख। जांच का कोई नियमित प्रावधान नहीं, सिर्फ कारण बताओ नोटिस। बार संचालक कमाई के लालच में क्षमता से ज्यादा ग्राहक घुसाते हैं। एक संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “NOC प्रक्रिया जटिल है, लेकिन बिना उसके चलाना जोखिम भरा।”

गुरुग्राम-नोएडा में भी वैसी ही स्थिति

गुरुग्राम: 926 बार-क्लब-रेस्तरां में से केवल 475 के पास वैध NOC। 451 बिना प्रमाण-पत्र के चल रहे। ओवरक्राउडिंग और अवैध निर्माण आम।

नोएडा (गौतम बुद्ध नगर): 2000+ क्लब, बार, पब, होटल। फायर NOC सिर्फ 102 के पास, बार लाइसेंस 154 के पास। लेकिन निकासी व्यवस्था, क्षमता उल्लंघन, फायर उपकरण खराब। सेक्टर 38A गार्डन गैलरिया मॉल जैसे स्थानों पर तीसरे-चौथे फ्लोर पर संचालन। प्राधिकरण, अग्निशमन और आबकारी विभाग के बीच सामंजस्य की कमी।

सरकारी कदम और चेतावनी: गोवा हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने होटल, क्लब, रेस्तरां को फायर एक्सटिंग्विशर, क्लियर एग्जिट और इलेक्ट्रिकल लोड चेक करने का निर्देश दिया। क्रिसमस-न्यू ईयर भीड़ को देखते हुए पेट्रोलिंग बढ़ाई। Noida DM मेधा रूपम ने मंगलवार को 20+ पब्स की जांच की, जहां सब कुछ संतोषजनक पाया, लेकिन मॉक ड्रिल और स्टाफ ट्रेनिंग पर जोर।

उल्लंघन पर NOC रद्द होने से लाइसेंस सस्पेंड, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं, नियमित ऑडिट और सख्त सजा जरूरी। NRAI दिल्ली चैप्टर हेड संदीप आनंद गोयल ने कहा, “फायर NOC ट्रेड लाइसेंस और लिकर लाइसेंस से पहले अनिवार्य। लेकिन पालन न होने से हजारों जोखिम में।

यह स्थिति गोवा जैसी त्रासदी को आमंत्रित कर रही है। प्रशासन को तत्काल ड्राइव चलाकर NOC अनिवार्य करना चाहिए, वरना जानमाल का नुकसान अपरिहार्य।

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