नई दिल्ली, 23 नवंबर 2025। Delhi Blast Case: दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए कार ब्लास्ट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इस जघन्य घटना में अब एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जांच एजेंसियों ने पर्दा उठाया है कि आतंकियों ने धमाके की साजिश रचने के लिए करीब 20 लाख रुपये इकट्ठे किए थे, लेकिन इसी फंडिंग को लेकर मुख्य संदिग्धों के बीच गंभीर विवाद हो गया।
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यह विवाद इतना तीव्र था कि इसने साजिश की पूरी रूपरेखा को प्रभावित कर दिया। मुख्य आरोपी डॉ. उमर खान, डॉ. मुजम्मिल शकील, अदील और शाहीन ने मिलकर यह रकम जुटाई। सूत्रों के अनुसार, ये पैसे मुख्य रूप से गुरुग्राम और नूह के इलाकों से NPK उर्वरक (अमोनियम नाइट्रेट) खरीदने और वाहनों को विस्फोटक से लैस करने के लिए इस्तेमाल किए जाने थे। डॉ. उमर को यह पूरी राशि सौंपी गई, लेकिन वितरण में असहमति के कारण मुजम्मिल और उमर के बीच तीखी बहस हुई। जांच में सामने आया कि मुजम्मिल ने उमर पर पैसे हड़पने का आरोप लगाया, जिससे साजिश में देरी हुई।
यह विवाद इतना बढ़ गया कि आतंकियों ने आपस में साजिश की रणनीति पर सवाल उठाने शुरू कर दिए, जिससे दिल्ली ब्लास्ट केवल एक हिस्सा बन गया।पुलिस और NIA की जांच से और भी भयावह तस्वीर उभर रही है। मूल साजिश में केवल दिल्ली तक सीमित न रहते हुए चार प्रमुख शहरों दिल्ली, अयोध्या, प्रयागराज और एक अन्य स्थान पर सीरियल ब्लास्ट का प्लान था।
इसके लिए चार पुरानी कारें तैयार की जा रही थीं, जिनमें से एक हुंडई i-20 पहले ही विस्फोटक से लदी थी। लाल किले के पास ब्लास्ट के बाद घटनास्थल से 400 मीटर दूर एक मानव हाथ बरामद हुआ, जो साजिश की भयानकता को दर्शाता है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी का कमरा नंबर 13 साजिश का मुख्य ठिकाना था, जहां डॉ. मुजम्मिल ने दीवाली के दौरान धमाका करने की योजना बनाई।
सरकार ने इसे ‘एक्ट ऑफ टेरर’ घोषित कर कैबिनेट मीटिंग में कड़ी कार्रवाई का फैसला लिया। पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने जांच को तेज करने के निर्देश दिए। हरियाणा पुलिस के सूत्रों ने बताया कि डॉक्टरों का यह नेटवर्क देशभर में बड़े हमलों की तैयारी कर रहा था। दो-दो सदस्यों के छोटे गिरोह बनाकर चार जगहों पर हमले की योजना थी, लेकिन फंडिंग विवाद ने इसे आंशिक रूप से विफल कर दिया।
इस घटना ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाल किला मेट्रो स्टेशन को ब्लास्ट के बाद बंद करना पड़ा, और CCTV फुटेज से संदिग्धों की तलाश तेज हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ISIS या अन्य वैश्विक नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। फिलहाल, आठ से अधिक संदिग्धों की पहचान हो चुकी है, और पूछताछ में और खुलासे होने की उम्मीद है। यह मामला न केवल दिल्ली, बल्कि पूरे देश की सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है। सरकार ने वादा किया है कि दोषियों को सख्त सजा दी जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी साजिशें न पनपें।
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