नई दिल्ली, 24 दिसंबर 2025। Delhi Assembly Winter Session: दिल्ली विधानसभा का शीतकालीन सत्र 5 जनवरी 2026 से शुरू होकर 8 जनवरी तक चलेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने इस चार दिवसीय सत्र की मंजूरी दी है। आवश्यकता पड़ने पर सत्र की अवधि बढ़ाई जा सकती है। यह भाजपा सरकार के कार्यकाल का पहला शीतकालीन सत्र होगा, जिसमें जनहित से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की उम्मीद है।
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सत्र की शुरुआत उपराज्यपाल वीके सक्सेना के अभिभाषण से होगी। सत्र में वायु प्रदूषण और शहर की सफाई-सफाई जैसे प्रमुख मुद्दों पर जोरदार हंगामा होने के आसार हैं। दिल्ली की खराब वायु गुणवत्ता और साफ-सफाई की समस्याएं लंबे समय से चर्चा में हैं, और विपक्षी आम आदमी पार्टी (AAP) इन पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है।
इसके अलावा, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की कुछ लंबित रिपोर्टों को सदन में पेश किए जाने की संभावना है, जिससे भाजपा और AAP के बीच तीखी बहस छिड़ सकती है। इन रिपोर्टों में पूर्व AAP सरकार के कार्यकाल की विभिन्न योजनाओं और प्रदर्शन की जांच शामिल है, जो राजनीतिक रूप से संवेदनशील साबित हो सकती हैं।
एक अन्य विवादास्पद मुद्दा पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आवासीय व्यवस्था से जुड़ा ‘फांसी घर’ विवाद हो सकता है, जहां केजरीवाल की अनुपस्थिति और संबंधित मुद्दों पर गरमागरम बहस की आशंका है। विपक्ष इन मौकों का इस्तेमाल कर वर्तमान भाजपा सरकार की नीतियों पर सवाल उठा सकता है, जबकि सत्तापक्ष पूर्व सरकार की कमियों को उजागर करने की कोशिश करेगा।
इस सत्र की सबसे बड़ी खासियत डिजिटलीकरण होगी। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के निर्देश पर अब सभी विधायी कार्य पूरी तरह राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन (NeVA) के माध्यम से किए जाएंगे। इसमें प्रश्न, नोटिस, उत्तर, विधेयक प्रस्ताव और अन्य दस्तावेज डिजिटल रूप से जमा और प्रबंधित होंगे। कागजी कार्रवाई पूरी तरह बंद हो जाएगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी, संचार आसान होगा और विधायी प्रक्रियाओं में देरी कम होगी।
अधिकारियों के अनुसार, ई-विधान ऐप से विभागों और विधानसभा के बीच डिजिटल समन्वय मजबूत होगा, जो जवाबदेही और कुशल शासन को बढ़ावा देगा। अध्यक्ष गुप्ता ने संबंधित अधिकारियों को सत्र से पहले सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने के सख्त निर्देश दिए हैं। दिल्ली विधानसभा पहले से ही पेपरलेस और सौर ऊर्जा से संचालित है, और यह कदम इसे और अधिक आधुनिक बनाएगा।
यह सत्र दिल्ली की राजनीति में नए समीकरणों को उजागर करेगा, जहां भाजपा सरकार अपनी उपलब्धियों को गिनाएगी और विपक्ष पुरानी कमियों को उठाएगा। जनता की नजर इन चर्चाओं पर टिकी रहेगी, खासकर प्रदूषण और सफाई जैसे रोजमर्रा के मुद्दों पर।
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