नई दिल्ली, 29 सितंबर 2025। Delhi Ashram Scandal: दिल्ली के वसंत कुंज स्थित श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट में 17 छात्राओं के यौन शोषण के गंभीर आरोपी स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ पार्थ सारथी की गिरफ्तारी ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। आगरा के एक सस्ते होटल से 28 सितंबर 2025 को दिल्ली पुलिस ने इस ‘डर्टी बाबा’ को धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में उसके फरारी के राज खुलने लगे हैं।
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जुलाई में विदेश यात्रा के बाद 6 अगस्त को शिकायत दर्ज होते ही फरार हो चुके चैतन्यानंद ने लगभग 40 दिनों में 13 अलग-अलग होटल बदले। ज्यादातर ठिकाने आगरा, मथुरा और वृंदावन जैसे धार्मिक शहरों में थे, जहां वह सस्ते गेस्ट हाउस और होटलों में छिपा रहा। पुलिस सूत्रों के अनुसार, वह रोजाना लोकेशन बदलता, ताकि ट्रेसिंग मुश्किल हो। आखिरी ठिकाना आगरा जा एक होटल था, जहां 27 सितंबर शाम को वह पहुंचा था।चैतन्यानंद का असली नाम और पहचान भी फर्जीवाड़े से भरी हुई निकली।
उसके पास दो पासपोर्ट बरामद हुए—एक पर ‘स्वामी पार्थ सारथी’ नाम, पिता स्वामी घनानंद पुरी, मां शारदा अंबा और जन्मस्थान दार्जिलिंग दर्ज था। दूसरे पर ‘स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती’, जन्म तमिलनाडु। पैन कार्ड, आधार और बैंक दस्तावेजों में भी नाम, जन्मतिथि और माता-पिता के नाम अलग-अलग थे। वह लोगों पर रौब जमाने के लिए फर्जी यूनाइटेड नेशंस (यूएन) और ब्रिक्स कार्ड इस्तेमाल करता। यहां तक कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का नाम लेकर फोन करवाता, ताकि कोई सवाल न उठे। पुलिस ने उसके पास से तीन मोबाइल फोन, एक आईपैड और दो संदिग्ध विजिटिंग कार्ड जब्त किए।
एक फोन में संस्थान के छात्रावास और परिसर के सीसीटीवी फुटेज मिले, जिनसे वह छात्राओं की निगरानी करता था। पूछताछ के दौरान चैतन्यानंद बेहद घबराया नजर आया। वह बार-बार कहता रहा, “मैं फोन का पासवर्ड भूल गया हूं, घबराहट हो रही है।” आईपैड और लैपटॉप का पासवर्ड भी नहीं बता रहा, जिससे डिजिटल सबूतों की जांच रुक गई है। दिल्ली पुलिस के डीसीपी (साउथ-वेस्ट) ने बताया कि बाबा शुरुआती जांच में सहयोग नहीं कर रहा। उसके आश्रम और ठिकानों पर छापेमारी में करोड़ों की संपत्ति, फर्जी दस्तावेज और वित्तीय अनियमितताओं के सुराग मिले।
एफआईआर में धारा 75(2)/79/351(2) बीएनएस के तहत यौन शोषण, ब्लैकमेल और संस्थान के पूर्व चेयरमैन रहते रात में छात्राओं को बुलाने के आरोप हैं। कई छात्राएं आर्थिक रूप से कमजोर थीं, जिन्हें ‘सेवा’ के नाम पर शोषित किया गया।जांच में 20 साल पुराना फर्जीवाड़े का नेटवर्क सामने आया। चैतन्यानंद ने संपत्ति हड़पने और प्रभाव बढ़ाने के लिए कई ट्रस्ट और संस्थान चलाए। अदालत ने उसे 5 दिन की पुलिस कस्टडी सौंपी है। यह मामला न केवल यौन शोषण का, बल्कि धार्मिक आड़ में अपराध का उदाहरण है।
सवाल उठ रहा है कि ऐसे स्वयंभू बाबाओं पर नकेल कैसे कसी जाए? छात्राओं की सुरक्षा और फर्जी पहचान पर सख्त कानून की मांग तेज हो गई है। चैतन्यानंद की गिरफ्तारी से पीड़िताओं को न्याय की उम्मीद जगी है, लेकिन उसके नेटवर्क की गहराई अभी खुलनी बाकी है।








