नई दिल्ली, 4 नवंबर 2025। Delhi AQI: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में हवा का हाल बेहद नाजुक हो चुका है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ स्तर पर पहुंच गया है, जिससे लाखों लोगों की सेहत पर संकट मंडरा रहा है। इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने सवाल उठाया कि जब अधिकांश एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन काम ही नहीं कर रहे, तो ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) को कैसे लागू किया जाएगा?
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सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस अश्वनी कुमार शामिल थे, ने कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) और सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट पर नाराजगी जताई।

अदालत को बताया गया कि दिल्ली-एनसीआर में 39 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से कई बंद पड़े हैं। इनमें से कुछ पर रखरखाव की कमी तो कुछ पर तकनीकी खराबी का हवाला दिया गया। जस्टिस गवई ने तल्ख़ लहजे में कहा, “अगर ये स्टेशन काम नहीं करेंगे, तो हमें प्रदूषण का सही स्तर पता ही नहीं चलेगा। GRAP के तहत स्टेज-1 से स्टेज-4 तक के उपाय कब और कैसे लागू होंगे?”
अदालत ने एजेंसियों को निर्देश दिया कि 48 घंटे के अंदर सभी स्टेशन चालू करवाएं और स्टेटस रिपोर्ट पेश करें।दिल्ली की हवा में जहर घुलने की मुख्य वजहें पराली जलाना, वाहनों का धुआं, निर्माण कार्य और मौसम का ठहराव हैं। नवंबर का महीना हर साल प्रदूषण का चरम लाता है, लेकिन इस बार स्थिति और भी विकराल है। CPCB के अनुसार, दिल्ली का औसत AQI 350 से ऊपर पहुंच गया है, जो बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन रोगियों के लिए घातक साबित हो रहा।
स्कूलों में आउटडोर एक्टिविटी बंद, मास्क अनिवार्य और स्वास्थ्य विभाग ने विशेष गाइडलाइन जारी की हैं।सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी दिल्ली प्रदूषण पर सख्ती दिखाई है। 2023 में पटाखों पर बैन लगाया था, लेकिन इस बार फोकस मॉनिटरिंग सिस्टम पर है।
अदालत ने कहा कि रिपोर्ट तो हर साल आती हैं, लेकिन एक्शन जीरो। अगर सुधार न हुआ तो कड़े निर्देश दिए जाएंगे। CAQM ने वादा किया कि स्टेज-3 के तहत निर्माण कार्य सीमित और 50% सरकारी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम का आदेश दिया जाएगा।यह मुद्दा न केवल दिल्ली बल्कि पूरे एनसीआर को प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक ऐसी हवा सांस की बीमारियां, हृदय रोग और कैंसर का खतरा बढ़ा सकती है। सरकार को अब ठोस कदम उठाने होंगे, वरना सुप्रीम कोर्ट की फटकार और सख्त होगी। प्रदूषण नियंत्रण के लिए अंतरराज्यीय समन्वय और हरित ऊर्जा पर जोर देना जरूरी है।
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