नई दिल्ली, 29 दिसंबर 2025। Cyber Fraud: साल 2025 में दिल्लीवासियों के लिए डिजिटल दुनिया बेहद महंगी साबित हुई है। साइबर ठगों ने राजधानी के लोगों से अब तक लगभग 1000 करोड़ रुपये की ठगी कर ली है। यह आंकड़ा दिल्ली पुलिस की स्पेशल यूनिट इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) के डिप्टी कमिश्नर विनीत कुमार के हवाले से सामने आया है।
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एक मोबाइल की रिंग, फेक लिंक या अमीर बनने का लालच – बस इतने से शुरू होकर साइबर अपराधी डर और भरोसे का फायदा उठाकर लोगों की गाढ़ी कमाई लूट रहे हैं। दिल्ली पुलिस के लिए भी यह आंकड़ा चौंकाने वाला है। तमाम अवेयरनेस कैंपेन और साइबर सिक्योरिटी प्रोग्राम के बावजूद ठगों ने इतनी बड़ी रकम कैसे उड़ा ली?
IFSO के अनुसार, यह ठगी पूरी दिल्ली की है – इसमें IFSO में दर्ज केसों के अलावा सभी 15 जिलों के साइबर पुलिस स्टेशनों में दर्ज FIR शामिल हैं। अच्छी बात यह है कि पुलिस ने बैंकों के साथ मिलकर ठगी की लगभग 20-24% रकम को होल्ड कराने में सफलता हासिल की है, जो 2024 के 10% से दोगुना है।
सबसे ज्यादा कौन से फ्रॉड?
2025 में साइबर क्राइम के ट्रेंड्स देखें तो टॉप पर शेयर मार्केट/इन्वेस्टमेंट स्कैम रहा। लोग फेक ट्रेडिंग ऐप्स और व्हाट्सऐप ग्रुप्स में लालच में फंसकर लाखों-करोड़ों निवेश कर बैठे। दूसरे नंबर पर डिजिटल अरेस्ट, जहां ठग पुलिस, CBI या कोरियर अधिकारी बनकर डराते हैं कि आपका नाम मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स केस में आ गया है। इसके अलावा बॉस स्कैम (कंपनी के बॉस बनकर कर्मचारियों से पैसे ट्रांसफर कराना), फिशिंग, क्रिप्टो लॉन्ड्रिंग, फेक लोन ऐप्स और कॉल सेंटर स्कैम ने भी खूब शिकार बनाया।
ठगों का मुख्य हथियार म्यूल बैंक अकाउंट्स और म्यूल सिम कार्ड्स रहे। पुलिस के ऑपरेशन साइहॉक (CyHawk) में 1000 से ज्यादा स्कैमर्स पकड़े गए, जिनसे 1000 करोड़ से अधिक की फ्रॉड ट्रेल का पता चला। 2024 में दिल्ली में करीब 1100 करोड़ की ठगी हुई थी, जबकि 2025 में यह आंकड़ा थोड़ा कम होने के बावजूद बेहद चिंताजनक है।
फ्रॉड होने पर क्या करें?
तुरंत ये 4 स्टेप्स फॉलो करें: अपने बैंक अकाउंट नंबर को कागज पर नोट कर लें।
UTR नंबर (ट्रांजैक्शन रेफरेंस) साथ रखें – NEFT के लिए 16 डिजिट, RTGS के लिए 22 और UPI के लिए 12 डिजिट।
ट्रांजैक्शन आईडी और अन्य डिटेल्स नोट करें।
फ्रॉड की डेट और टाइम याद रखें।
फिर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर कंप्लेंट दर्ज करें, जितनी जल्दी रिपोर्ट करेंगे, उतनी ज्यादा रकम बचने की संभावना।दिल्ली पुलिस ने साइबर स्टेशन सभी जिलों में बनाए हैं और IFSO को इंडिपेंडेंट यूनिट का दर्जा दिया है। फिर भी ठगों की नई-नई मॉडस ऑपरेंडी से जागरुकता ही सबसे बड़ा हथियार है। लालच या डर में आकर कोई लिंक क्लिक न करें, अनजान नंबर से पैसे ट्रांसफर न करें।
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