हैदराबाद, 31 अक्टूबर 2025। Cyber Fraud: हैदराबाद के श्रीनगर कॉलोनी में रहने वाले एक 78 वर्षीय सेवानिवृत्त केंद्रीय सरकारी कर्मचारी डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर साइबर अपराधियों के चंगुल में फंस गए। जालसाजों ने मुंबई क्राइम ब्रांच के एसीपी बनकर उन्हें फोन किया और धमकी दी कि उनके नाम पर जारी मोबाइल सिम बम विस्फोटों व अपहरण के मामलों में इस्तेमाल हो रहा है। फर्जी CBI नोटिस दिखाकर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया गया, जिससे बुजुर्ग डर गए।
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घटना की शुरुआत एक अनजान कॉल से हुई। आरोपी ने वीडियो कॉल पर खुद को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताते हुए बुजुर्ग को ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ में ले लिया। उन्होंने सख्त हिदायत दी कि घर से बाहर न निकलें, किसी अन्य को फोन न करें और तुरंत बैंक खाते की पूरी डिटेल साझा करें। जालसाजों ने दावा किया कि जांच पूरी होने पर सारा पैसा लौटा दिया जाएगा, लेकिन पहले 95% राशि ‘सुरक्षित’ अकाउंट में ट्रांसफर करनी होगी। भयभीत बुजुर्ग ने आखिरकार 51 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
कई दिनों तक इंतजार के बाद जब पैसे नहीं लौटे, तो ठगी का पर्दाफाश हुआ।पीड़ित ने तुरंत हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला संज्ञान में ले लिया है और आरोपी की तलाश तेज कर दी है। जांच में पता चला कि यह एक सुनियोजित धोखाधड़ी का सिलसिला है, जहां फर्जी दस्तावेजों और वीडियो कॉल का सहारा लिया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट स्कैम में अपराधी कानूनी भाषा का इस्तेमाल कर पीड़ितों को मनोवैज्ञानिक दबाव में लाते हैं।
यह मामला हैदराबाद में बढ़ते साइबर अपराधों की गंभीर तस्वीर पेश करता है। इसी हफ्ते एक 73 वर्षीय महिला से 1.43 करोड़ रुपये की ठगी का मामला भी सामने आया था, जहां फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाए गए थे। पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। यदि कोई संदिग्ध कॉल आए, तो तुरंत 1930 पर संपर्क करें। जागरूकता ही एकमात्र हथियार है, जो इन जालों से बचा सकती है। बुजुर्गों को विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए, क्योंकि वे आसान शिकार बन जाते हैं।
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