मध्य प्रदेश, 9 अक्टूबर 2025। Coldrif Cough Syrup Case: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में जहरीले कफ सिरप पीने से 20 बच्चों की दर्दनाक मौत के मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। विशेष जांच दल (SIT) ने इस कांड में तेज कार्रवाई करते हुए दवा बनाने वाली श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स के मालिक रंगनाथन गोविंदन को गिरफ्तार कर लिया।
छिंदवाड़ा के पुलिस अधीक्षक अजय पांडे के अनुसार, यह गिरफ्तारी 8 अक्टूबर की रात चेन्नई में की गई। आरोपी पर 20 हजार रुपये का इनाम घोषित था। SIT अब ट्रांजिट रिमांड पर उसे मध्य प्रदेश ला रही है, जहां गहन पूछताछ होगी। यह मामला सबसे पहले छिंदवाड़ा और बैतूल जिलों में सामने आया, जहां पिछले दो हफ्तों में कई मासूमों की जान चली गई। बाद में राजस्थान के कुछ क्षेत्रों से भी इसी सिरप से जुड़ी घटनाएं रिपोर्ट हुईं। प्रभावित बच्चे दो से पांच साल की उम्र के थे।
सिरप पीने के बाद उन्हें उल्टी, पेशाब में रुकावट, तेज बुखार जैसे लक्षण दिखे। डॉक्टरों की जांच में पता चला कि उनकी किडनी पूरी तरह फेल हो चुकी थी। कई बच्चों को नागपुर और भोपाल के अस्पतालों में रेफर किया गया, जहां टेस्ट में उनके शरीर में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक जहरीले केमिकल का असर मिला। यह केमिकल किडनी को नष्ट कर देता है और जानलेवा साबित होता है।
तमिलनाडु स्थित श्रीसन फार्मा कंपनी पहले भी गुणवत्ता मानकों के उल्लंघन में फंसी रही है। SIT की जांच में सामने आया कि कंपनी ने ग्लिसरॉल की जगह सस्ते और खतरनाक डायथिलीन ग्लाइकॉल का इस्तेमाल किया। कई बैचों की जांच बिना पूरी किए ही इन्हें मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में बेच दिया गया। याद रहे, इसी केमिकल से 2022 में गाम्बिया और 2023 में उज्बेकिस्तान में भारतीय दवाओं के कारण दर्जनों बच्चों की मौत हुई थी।
सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार ने संयुक्त जांच समिति गठित की है। कार्रवाई में कंपनी मालिक के अलावा दो मेडिसिन कंट्रोलर और एक उपनिदेशक को निलंबित कर दिया गया। स्टेट मेडिसिन कंट्रोलर का तबादला हो गया। छिंदवाड़ा के डॉक्टर प्रवीण सोनी को लापरवाही और गलत दवा लिखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि आपराधिक साजिश है। अगर जानबूझकर जहरीला केमिकल इस्तेमाल साबित हुआ, तो IPC की धारा 304 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत मुकदमा चलेगा। “यह घटना भारतीय दवा उद्योग की गुणवत्ता नियंत्रण पर सवाल खड़े करती है। हजारों परिवारों का दर्द कम करने के लिए सख्त कानून और निगरानी जरूरी है। SIT की आगे की जांच से और राज खुलेगा।
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