-
CoinDCX वॉलेट = स्कैमर्स का ATM? 21 महीने में 2872 लोग लुटे!
नई दिल्ली, 25 नवंबर 2025। CoinDCX Wallet: क्रिप्टोकरेंसी के चमकदार दुनिया में छिपे अंधेरे राज अब खुलने लगे हैं। गृह मंत्रालय (MHA) की ताजा रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि, साइबर ठगों ने पिछले 21 महीनों (जनवरी 2024 से सितंबर 2025) में 2,872 निर्दोष लोगों से करीब 624 करोड़ रुपये की ठगी की। लेकिन इस लूट का असली केंद्र कहां है? रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंज CoinDCX पर सवालों का तीर सीधा निशाना साध रहा है। यह प्लेटफॉर्म, जो खुद को भारत का ‘सुरक्षित’ एक्सचेंज बताता है, वास्तव में स्कैमर्स का पसंदीदा हथियार बन चुका है। हर बड़ा घोटाला हो या छोटा फ्रॉड, चोरों का पैसा कहीं न कहीं CoinDCX के वॉलेट्स से होकर गुजरता है, और फिर हमेशा के लिए गायब!
इसे भी पढ़ें- Cyber Fraud: सिर्फ 2 रुपये का पेमेंट किया और खाली हो गया बैंक अकाउंट, दिल्ली में साइबर ठगी का नया तरीका
सरकार की रडार पर 27 क्रिप्टो एक्सचेंज

रिपोर्ट में 27 क्रिप्टो एक्सचेंजों को सरकार के रडार पर डाला गया है, लेकिन CoinDCX का नाम सबसे ऊपर चमक रहा है। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने इन प्लेटफॉर्म्स की एक गुप्त सूची तैयार की है, जिसमें WazirX, Giottus, ZebPay, Mudrex, CoinSwitch जैसे नाम तो हैं ही, लेकिन CoinDCX का दबदबा सबसे ज्यादा। क्यों? क्योंकि यह एक पूर्ण भारतीय एक्सचेंज है, मुंबई में रजिस्टर्ड, FIU-IND से लाइसेंस्ड, और लाखों भारतीय यूजर्स का भरोसा जीतने वाला। लेकिन यही इसका सबसे बड़ा हथियार है! ठग लोग पहले UPI या बैंक से पैसा लूटते हैं, फिर उसे तुरंत CoinDCX पर ट्रांसफर कर क्रिप्टो में बदल देते हैं।
वहां से मल्टी-सिग्नेचर वॉलेट्स और MPC तकनीकों के नाम पर पैसा कई लेयर्स में घुमाया जाता है, और अंत में विदेशी एक्सचेंजों (जैसे Onlychain Vilnius या Ezipay Ebene) में उड़ जाता है। पीड़ितों को तो पता ही नहीं चलता कि उनका कठिन कमाया पैसा, जो ‘तेज कमाई’ के वादे पर निवेश किया था, CoinDCX के ‘सुरक्षित’ वॉलेट्स से ही लुप्त हो गया!
MHA की रिपोर्ट के आंकड़े खौफनाक हैं
कुल 1,608 शिकायतों में 200 करोड़ रुपये सीधे भारतीय VASP प्लेटफॉर्म्स पर पहुंचे, जिनमें CoinDCX का हिस्सा सबसे बड़ा बताया जा रहा है। वहीं, 1,264 मामलों में 424 करोड़ रुपये विदेश भागे। सबसे चौंकाने वाला केस? 10 करोड़ रुपये का ट्रांसफर, जो CoinDCX से होकर UK/US बेस्ड Onlychain Vilnius पहुंचा – और वहां से गायब!
ठगों ने KYC की खामियों का फायदा उठाया
बिना पूरी वेरिफिकेशन के अकाउंट खोले, सस्पिशियस ट्रांजेक्शन्स को छिपाया। Enforcement Directorate (ED) और FIU-IND अब ‘क्रिप्टो म्यूल्स’ की तलाश में जुटे हैं – वे मध्यस्थ जो CoinDCX जैसे प्लेटफॉर्म्स पर पैसा ‘वॉश’ करते हैं। रिपोर्ट कहती है, यह आइसबर्ग का सिर्फ टिप है, असल नुकसान हजारों करोड़ों का हो सकता है।
CoinDCX का बचाव क्या है?
कंपनी के CEO सुमित गुप्ता कहते हैं, “हम सुरक्षा में सबसे आगे हैं – मल्टी-सिग्नेचर वॉलेट्स और प्रूफ ऑफ रिजर्व्स से यूजर्स सुरक्षित हैं।” लेकिन सवाल वही: अगर इतना सुरक्षित है, तो स्कैमर्स बार-बार क्यों चुनते हैं CoinDCX को अपना ‘गेटवे’? विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय होने के कारण यह आसान टारगेट है, लोकल UPI इंटीग्रेशन, तेज INR-क्रिप्टो कन्वर्जन, और कम सख्त मॉनिटरिंग। WazirX का 235 मिलियन डॉलर का हैक तो हो ही गया, लेकिन CoinDCX पर सवाल और गहरे हैं।

ZebPay और Mudrex जैसे प्रतिद्वंद्वी दावा करते हैं कि वे सख्त KYC से बचे हैं, लेकिन CoinDCX के 1.4 करोड़ यूजर्स का भरोसा अब डगमगा रहा है। भारत में क्रिप्टो रेगुलेशन्स की कमजोरी भी सामने आ रही है। 2023 से FIU रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, लेकिन GST विभाग (DGGI) ने 2022 में 17 एक्सचेंजों पर छापे मारे थे, 824 करोड़ का टैक्स चोरी! जुलाई 2024 से विदेशी प्लेटफॉर्म्स भी GST के दायरे में हैं। फिर भी, CoinDCX जैसे भारतीय एक्सचेंजों पर सवाल: क्या वे सिर्फ ‘सुविधा’ देते हैं या अप्रत्यक्ष रूप से लॉन्ड्रिंग में साझीदार? Giottus CEO विक्रम सुब्बुराज की तुलना Swiggy से सही लगती है, लेकिन जब पैसा गायब हो जाता है, तो जिम्मेदारी किसकी?
सरकार अब सख्ती बरत रही है
I4C की लिस्ट पर ED, CBI और साइबर सेल सक्रिय। CoinDCX को नोटिस मिल चुके हैं और जांच में अगर KYC गड़बड़ी साबित हुई, तो लाइसेंस रद्द का खतरा मंडरा रहा है। पीड़ितों के लिए राहत? NCRP पोर्टल पर शिकायत करें, लेकिन समय रहते FIR जरूरी। क्रिप्टो की चमक में छिपा यह अंधेरा कब खत्म होगा? सवाल वही – ट्रस्ट टूटा तो बाजार कैसे बचेगा?
(स्रोत: MHA रिपोर्ट, I4C डेटा, ED जांच –
इसे भी पढ़ें- अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर ED का बड़ा एक्शन, फर्जी UGC-NAAC मान्यता दिखाकर 415 करोड़ की ठगी, चेयरमैन गिरफ्तार








