मुंबई, 4 दिसंबर 2025: Burqa Dress Code Controversy: गोरेगांव वेस्ट के विवेक जूनियर कॉलेज में एक बार फिर बुर्का को लेकर तीखा विवाद खड़ा हो गया है। कॉलेज प्रशासन ने कक्षाओं में पूरे चेहरे को ढकने वाले बुर्के (नकाब सहित) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है, जबकि हिजाब (सिर ढकने वाला स्कार्फ) की अनुमति है। इस भेदभावपूर्ण नियम को लेकर मुस्लिम छात्राएं पिछले तीन दिनों से कॉलेज गेट के बाहर भूख हड़ताल पर बैठी हैं।
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छात्राओं का साफ कहना है, “जब हिजाब की इजाजत है तो बुर्का क्यों नहीं? दोनों हमारी धार्मिक पहचान और निजी पसंद का हिस्सा हैं।” उनका तर्क है कि पढ़ाई के दौरान बुर्का पहनने से न तो किसी का ध्यान भटकता है और न ही अनुशासन पर असर पड़ता है। हड़ताल कर रही एक छात्रा ने कहा, “हमें अलग-थलग महसूस कराया जा रहा है। हम सिर्फ अपनी आस्था के मुताबिक कपड़े पहनना चाहती हैं।”
AIMIM ने खुलकर किया समर्थन
विवाद बढ़ता देख AIMIM की मुंबई महिला विंग उपाध्यक्ष एवं वकील जाहनारा शेख मौके पर पहुंचीं। उन्होंने कॉलेज प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा, “हिजाब की अनुमति है तो बुर्का पर रोक तर्कसंगत नहीं। जब तक यह पढ़ाई या अनुशासन में बाधा नहीं डालता, छात्राओं को अपने धार्मिक परिधान का पूरा अधिकार है। यह सीधे-सीधे संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) का उल्लंघन है।” पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह में प्रतिबंध नहीं हटाया गया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
कॉलेज का पक्ष, सुरक्षा सबसे ऊपर
कॉलेज प्रिंसिपल और ट्रस्टी बोर्ड ने सख्ती से अपना फैसला बरकरार रखा है। उनका कहना है कि पूरे चेहरे को ढकने से पहचान सत्यापन में दिक्कत होती है, जिससे कैंपस में सुरक्षा जोखिम बढ़ जाता है। प्रिंसिपल ने बताया, “हम हिजाब की अनुमति देते हैं क्योंकि उससे चेहरा दिखता है, लेकिन नकाब से चेहरा पूरी तरह ढक जाता है। प्रॉक्सी अटेंडेंस, परीक्षा में नकल और बाहरी व्यक्ति के घुसने का खतरा रहता है। यह नियम सभी धर्मों के लिए समान है, हम धार्मिक भावनाओं का विरोध नहीं कर रहे।”
अभिभावक भी मैदान में
अभिभावकों ने भी मोर्चा खोल दिया है। कई माता-पिता ने कहा कि उनकी बेटियां पिछले दो साल से बुर्का पहनकर कॉलेज आ रही थीं, अचानक यह रोक क्यों? एक अभिभावक ने पूछा, “क्या पिछले दो साल में कोई सुरक्षा घटना हुई थी? यदि नहीं, तो अब यह नियम क्यों?” अभिभावकों ने मांग की है कि सुरक्षा के नाम पर धार्मिक स्वतंत्रता का हनन नहीं होना चाहिए। वे बातचीत से बीच का रास्ता निकालने को तैयार हैं, जैसे कि प्रवेश द्वार पर पहचान जांच के बाद बुर्का की अनुमति।आगे क्या?
मामला अब मानवाधिकार आयोग और अल्पसंख्यक आयोग तक पहुंचने की कगार पर है। छात्राएं हड़ताल जारी रखने का ऐलान कर चुकी हैं। कॉलेज प्रशासन ने कहा है कि वह ट्रस्टी बोर्ड की अगली बैठक में इस मुद्दे पर पुनर्विचार कर सकता है, लेकिन अभी कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया गया है। यह विवाद एक बार फिर हिजाब-बुर्का और ड्रेस कोड की बहस को राष्ट्रीय स्तर पर ला खड़ा कर रहा है, जहां एक तरफ धार्मिक स्वतंत्रता और निजी पसंद की बात हो रही है तो दूसरी तरफ शैक्षणिक संस्थानों में एकसमान नियम और सुरक्षा का सवाल।
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