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Bihar Elections 2025: तेजस्वी का बड़ा ऐलान, कहा- सरकार बनी तो जीविका दीदियों को 30 हजार वेतन और स्थायी नौकरी मिलेगी

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Bihar Elections 2025

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पटना, 4 नवंबर 2025। Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनावों के ठीक पहले राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने महिलाओं को साधने के लिए एक जोरदार घोषणा की है। बुधवार को उन्होंने कहा कि महागठबंधन की सरकार बनने पर जीविका योजना से जुड़ी ‘दीदियों’ को स्थायी सरकारी नौकरी दी जाएगी और उनका मासिक वेतन 30 हजार रुपये किया जाएगा। यह वादा न केवल जीविका कम्युनिटी मोबिलाइजर (सीएम) दीदियों के लिए है, बल्कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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तेजस्वी ने अपनी रैली में स्पष्ट शब्दों में कहा, “गांव हो या शहर, कोई काम जीविका दीदियों के बिना संभव नहीं। लेकिन वर्तमान सरकार उन्हें कुछ नहीं दे रही। हमारी सरकार बनने पर उन्हें स्थायी नौकरी, 30 हजार रुपये मासिक वेतन, लोन पर ब्याज माफी, अगले दो साल तक ब्याज-मुक्त क्रेडिट, अतिरिक्त 2 हजार रुपये भत्ता और 5 लाख रुपये का बीमा कवर दिया जाएगा।” यह घोषणा बिहार की लगभग 3.5 करोड़ महिला मतदाताओं को ध्यान में रखकर की गई है, जो 2020 के चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा चुकी हैं।

Bihar Elections 2025

जीविका योजना, जो 2007 में वर्ल्ड बैंक के सहयोग से शुरू हुई थी। बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम है। यह योजना स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय सहायता, बाजार से जुड़ाव और पोषण-सफाई सेवाओं तक पहुंच प्रदान करती है। तेजस्वी ने मौजूदा नीतीश कुमार सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भ्रष्ट अधिकारी और सरकार लोगों की तकलीफों से अछूते हैं। उन्होंने एनडीए की ‘माई बहन मान योजना’ के तहत 10 हजार रुपये की सहायता को ‘रिश्वत’ करार दिया, जो अमित शाह के बयान के हवाले से उधार का बताया।

यह ऐलान चुनावी रणनीति का हिस्सा है, जहां एनडीए (बीजेपी-जेडीयू) और महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस-वाम दल) के बीच कांटे की टक्कर है। प्राशांत किशोर की जन सुराज भी 243 सीटों पर दावा ठोक रही है। चुनाव 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होंगे, जबकि नतीजे 14 नवंबर को आएंगे। एनडीए ने भी महिलाओं के लिए कई योजनाएं लॉन्च की हैं, जैसे विधवाओं को 400 से 1400 रुपये पेंशन, आशा-अनम कार्यकर्ताओं को मानदेय वृद्धि और स्थानीय निकायों में 50% आरक्षण।

बीजेपी ने तेजस्वी के वादों को ‘असंभव’ बताते हुए खारिज किया। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि तीन करोड़ नौकरियां पैदा करना बिहार के बजट से चार गुना ज्यादा खर्च मांगता है। अमित शाह ने परिवार प्रति एक नौकरी के वादे को ‘भ्रमित करने वाला’ कहा। विपक्ष का मानना है कि एनडीए की योजनाएं उधार आधारित हैं, जबकि आरजेडी के वादे स्थायी राहत देंगे।

यह घोषणा बिहार की राजनीति में महिलाओं के वोट बैंक को हाईलाइट करती है, जहां 2020 में महिला-बहुल सीटों पर एनडीए ने 72 सीटें जीती थीं। तेजस्वी का यह दांव महागठबंधन को मजबूत करने का प्रयास है, लेकिन क्या यह वोटरों को लुभा पाएगा, यह तो नतीजों पर निर्भर करेगा। कुल मिलाकर, बिहार चुनाव महिलाओं के मुद्दों पर केंद्रित हो चुके हैं।

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