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Bareilly Violence: पूरे शहर को हिंसा में झोंकना था मकसद, ये उपद्रव की पूरी टाइमलाइन

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Bareilly Violence

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बरेली, 27 सितंबर 2025। Bareilly Violence: बरेली में शुक्रवार को हुए हिंसक प्रदर्शन और उपद्रव ने पूरे शहर को दहशत में डाल दिया। यह कोई अनायास घटना नहीं थी, बल्कि पुलिस और प्रशासन का दावा है कि यह एक सुनियोजित साजिश थी, जिसका मकसद शहर को हिंसा की आग में झोंकना था। जिले में धारा 163 लागू होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने न केवल सड़कों पर उतरकर नारेबाजी की, बल्कि पुलिस पर पथराव और तोड़फोड़ भी की। इस लेख में इस घटना की पूरी टाइमलाइन और इसके पीछे की साजिश को समझा जा सकता है।

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घटना की शुरुआत और पुलिस की तैयारी

शुक्रवार दोपहर करीब ढाई बजे जुमे की नमाज के बाद अचानक खलील तिराहे के पास स्मार्ट सिटी ऑडिटोरियम के आसपास भीड़ जमा होने लगी। पुलिस ने इस्लामियां ग्राउंड को पूरी तरह से सील कर दिया था और वहां भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। एसएसपी ने कुल 3218 पुलिसकर्मियों को तैनात किया था, जिसमें 500 दारोगा, 2500 आरक्षी, 13 सीओ, पांच एडिशनल एसपी, आठ ड्रोन टीमें और 15 क्यूआरटी शामिल थीं। प्रशासन ने दो दिन पहले से ही धर्मगुरुओं से बातचीत शुरू कर दी थी ताकि माहौल शांत रहे।

प्रदर्शन से हिंसा तक

दोपहर करीब तीन बजे गलियों और मोहल्लों से सैकड़ों की संख्या में युवक निकले, जो “आई लव मुहम्मद” के पोस्टर लिए नारेबाजी करते हुए इस्लामियां ग्राउंड की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं माने। डीआईजी अजय कुमार सहानी और एसपी सिटी मानुष पारीक ने भीड़ को समझाने का प्रयास किया, मगर जवाब में पथराव शुरू हो गया। इसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, जिससे प्रदर्शनकारी तितर-बितर हो गए। इस दौरान कई दुकानों और संपत्तियों को नुकसान पहुंचा।

शहर के अन्य हिस्सों में बवाल

जीआईसी और नौमहला मस्जिद के पास भी भीड़ ने पुलिस पर हमला किया। यहां धक्कामुक्की और पथराव के बाद पुलिस ने फिर लाठीचार्ज किया, जिससे 10 मिनट में स्थिति नियंत्रण में आ गई। आजमनगर, किला और नावल्टी की ओर से भी भीड़ इस्लामियां ग्राउंड पहुंचने की कोशिश में थी, लेकिन पुलिस ने बैरियर लगाकर उन्हें रोका। श्यामगंज में एक घंटे तक उपद्रवियों ने पुलिस को चुनौती दी, लेकिन एसएसपी के आदेश पर लाठीचार्ज के बाद भीड़ खदेड़ दी गई। रोडवेज की ओर भागे कुछ उपद्रवियों को दुकानदारों ने भी भगाया।

पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ ज्ञापन देने का मामला नहीं था, बल्कि शहर को हिंसा में झोंकने की साजिश थी। मौलाना तौकीर रजा को घर से निकलने नहीं दिया गया, लेकिन उनके आह्वान पर प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। डीआईजी अजय कुमार सहानी ने कहा कि इस उपद्रव में शामिल किसी को बख्शा नहीं जाएगा और साजिशकर्ताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।

कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जबकि कुछ मौके से फरार हो गए। बरेली में हुआ यह उपद्रव एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है। पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से स्थिति को और बिगड़ने से रोका गया। इस घटना ने प्रशासन और जनता के बीच तनाव को उजागर किया है, साथ ही शहर में शांति बनाए रखने की चुनौती को भी सामने लाया है।

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