मथुरा, 24 अक्टूबर 2025। Banke Bihari Temple: वृंदावन के प्रसिद्ध ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर का 54 वर्ष पुराना खजाना अब पूरी तरह से खुलने की कगार पर है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई-पावर कमेटी ने हाल ही में मंदिर के गर्भगृह के ठीक नीचे 30 फुट गहराई में बने गुप्त तहखाने (तोषखाने) को खोला, लेकिन भक्तों और सेवायतों की उम्मीदें टूट गईं। खजाने में उम्मीद के मुताबिक सोने-चांदी के ढेर के बजाय मात्र चार पुराने संदूक, कुछ चढ़ावे के बर्तन, एक चांदी का छाता, सोने की एक छड़ी और कुछ कीमती पत्थर ही बरामद हुए।
यह खुलासा न केवल आश्चर्यजनक था, बल्कि कई सवाल खड़े कर गया—मंदिर को दान में मिले असंख्य आभूषण और संपत्ति आखिर कहां गायब हो गई? अब कमेटी ने 1971 की पुरानी इन्वेंटरी की तलाश तेज कर दी है, जो माना जा रहा है कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के एक लॉकर में बंद लोहे के बक्से में सुरक्षित है।1971 में मंदिर का तोषखाना आखिरी बार खोला गया था। उस समय मंदिर प्रशासन ने चढ़ावे के जेवरात, आभूषण और अन्य कीमती वस्तुओं को एक विशेष बक्से में पैक कर बैंक के लॉकर में जमा करा दिया था। तब से यह बक्सा अनछुआ पड़ा है।
हाई-पावर कमेटी के चेयरमैन वरिष्ठ वकील अरविंद पांडे के नेतृत्व में टीम अब उस इन्वेंटरी को प्राप्त करने के लिए प्रयासरत है। कमेटी का मानना है कि 1971 की विस्तृत सूची से यह स्पष्ट हो जाएगा कि मंदिर का मूल खजाना क्या था और उसके बाद क्या-क्या चढ़ावा आया। यदि बक्से में वही पुरानी इन्वेंटरी मिली, तो वर्तमान तोषखाने में मिले सामान का मिलान कर गायब संपत्ति का पता लगाया जा सकेगा।
मंदिर के सेवायतों और गोस्वामियों के बीच इस खुलासे को लेकर हड़कंप मच गया है। कई सेवायतों ने तोषखाने में कम सामान मिलने पर सीबीआई जांच की मांग उठाई है। उनका आरोप है कि दशकों में मंदिर को करोड़ों का चढ़ावा मिला, लेकिन रिकॉर्ड में केवल नाममात्र का उल्लेख है। एक सेवायत ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यह खजाना भगवान का है, इसका दुरुपयोग किसी को बर्दाश्त नहीं। 1971 के बाद कई बार चढ़ावे आए, लेकिन इनकी गिनती और रखरखाव में लापरवाही हुई।”
दूसरी ओर, कमेटी ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष होगी और कोई भी दस्तावेज या संपत्ति छिपाई नहीं जाएगी। यह घटना मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठाती है। बांकेबिहारी मंदिर, जो लाखों भक्तों का केंद्र है, हर साल करोड़ों का चढ़ावा प्राप्त करता है। फिर भी, तोषखाने का रखरखाव और पारदर्शिता का अभाव लंबे समय से विवाद का विषय रहा। सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में ही मंदिर के प्रबंधन के लिए यह कमेटी गठित की थी, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो। अब बैंक लॉकर से बक्सा निकालने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि इन्वेंटरी में न केवल जेवरातों की सूची होगी, बल्कि ऐतिहासिक दस्तावेज भी हो सकते हैं, जो मंदिर के इतिहास को नई रोशनी डालेंगे।कुल मिलाकर, यह खुलासा भक्ति के साथ-साथ प्रशासनिक सुधार की मांग को बल दे रहा है। यदि 1971 की इन्वेंटरी मिल गई, तो मंदिर के खजाने के हर रहस्य का पर्दाफाश हो जाएगा। भक्तों को उम्मीद है कि इससे मंदिर की धरोहर सुरक्षित रहेगी और भगवान बांकेबिहारी की जय हो। वृंदावन की इस पवित्र भूमि पर अब न्याय और पारदर्शिता की जीत की प्रतीक्षा है।
इसे भी पढ़ें- Banke Bihari Temple Controversy: SC ने भगवान कृष्ण को बताया पहला मध्यस्थ, यूपी सरकार से पूछे तीखे सवाल








