नई दिल्ली, 31 दिसंबर 2025। Bangladesh Violence: बांग्लादेश में दिसंबर 2025 का महीना अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लिए बेहद खतरनाक साबित हुआ। राजनीतिक अस्थिरता और कट्टरपंथी ताकतों के उभार के बीच हिंदुओं पर लक्षित हमले बढ़ गए हैं। सिर्फ इस महीने में कई हिंदू युवकों की बेरहमी से हत्या हुई, घरों में आग लगाई गई और ईशनिंदा के झूठे आरोपों का सहारा लिया गया।
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ये घटनाएं अंतरिम सरकार की नाकामी को उजागर कर रही हैं, जहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही। प्रमुख हत्याएं और हमले18 दिसंबर को मयमनसिंह जिले के भालुका में 27 वर्षीय गारमेंट कर्मचारी दीपू चंद्र दास पर झूठी ईशनिंदा का आरोप लगाकर भीड़ ने उन्हें पीट-पीटकर मार डाला। मौत के बाद शव को पेड़ से लटकाकर जला दिया गया। जांच में आरोप झूठा पाया गया, फिर भी यह सबसे वीभत्स घटना बनी।

एक सप्ताह बाद, 24 दिसंबर को राजबाड़ी जिले के पांगशा में 29 वर्षीय अमृत मंडल उर्फ सम्राट को भीड़ ने डंडों और लात-घूंसों से पीटकर मार डाला। पुलिस ने इसे आपराधिक गतिविधियों से जोड़ा, लेकिन समुदाय इसे धार्मिक लक्ष्यीकरण मानता है। 29 दिसंबर को फिर मयमनसिंह के भालुका में 40 वर्षीय अंसार सदस्य बजेंद्र बिस्वास को उनके मुस्लिम सहकर्मी नोमान मियां ने गोली मार दी। फैक्ट्री ड्यूटी के दौरान हुई यह घटना दिखाती है कि सुरक्षा बलों में तैनात हिंदू भी सुरक्षित नहीं। पुलिस ने इसे दुर्घटना बताया, लेकिन गिरफ्तारी हुई।
इन हत्याओं के अलावा, 27-28 दिसंबर को पिरोजपुर जिले के दुमरितला गांव में हिंदू परिवारों के 5-6 घरों में आग लगा दी गई। हमलावरों ने दरवाजे बाहर से बंद कर दिए, लेकिन परिवार किसी तरह जान बचाकर भाग निकले। संपत्ति और मवेशी जलकर राख हो गए। मानवाधिकार समूहों की रिपोर्ट्स के अनुसार, दिसंबर में हिंदुओं पर कम से कम 12 हत्याएं हुईं, जबकि पूरे साल में अल्पसंख्यकों पर 2600 से अधिक हमले दर्ज। ईशनिंदा के आरोपों में जून से दिसंबर तक 71 मामले सामने आए।
भारत सरकार की भूमिकाभारत ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा की है और बांग्लादेश से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। विशेषज्ञों का सुझाव है कि भारत कूटनीतिक दबाव बढ़ाए—उच्चस्तरीय वार्ता, संयुक्त निगरानी और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुद्दा उठाए। व्यापार, वीजा नीति या सांस्कृतिक सहयोग पर अस्थायी प्रतिबंध लगाकर भी संदेश दिया जा सकता है। भारत हमेशा पड़ोसी देशों में शांति और मानवाधिकारों का समर्थन करता रहा है। ये घटनाएं बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की गिरावट और अल्पसंख्यक असुरक्षा को रेखांकित करती हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दखल देना चाहिए ताकि ऐसी हिंसा रुके।
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