पटना, 2 नवंबर 2025। बिहार चुनाव 2025 के बीच सियासी तापमान चढ़ाते हुए योग गुरु बाबा रामदेव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रतिबंध की मांग पर जोरदार हमला बोला है। रविवार को हरिद्वार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बाबा रामदेव ने कहा, “आरएसएस का विरोध वही करता है, जो राष्ट्रविरोधी और सनातन-विरोधी ताकतों का एजेंडा चला रहा है। ये लोग ‘सनातनी’ नहीं, बल्कि ‘तनातनी’ हैं, जिनके विचार भारत और भारतीयता से मेल नहीं खाते।”
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उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए जोड़ा, “अगर लड़ाई करनी है, तो पहले नरेंद्र मोदी और अमित शाह को चुनाव में हराओ। आरएसएस पर बैन की मांग से कुछ नहीं होगा, यह स्वार्थी मकसद का हिस्सा है।” बाबा रामदेव का यह बयान खड़गे के हालिया बयान के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने आरएसएस को ‘विभाजनकारी’ बताते हुए प्रतिबंध की बात कही थी।

रामदेव ने आरएसएस को राष्ट्र निर्माण का प्रतीक बताते हुए कहा कि संगठन ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आजादी के बाद देश सेवा में अहम भूमिका निभाई है। “ये ताकतें आरएसएस को कमजोर करके सनातन धर्म को निशाना बना रही हैं, लेकिन जनता सब समझ रही है,” उन्होंने जोर देकर कहा। उनका यह बयान बिहार चुनावी माहौल में एनडीए समर्थकों के बीच उत्साह ला रहा है, जबकि विपक्ष इसे ‘भटकाव का प्रयास’ बता रहा है।
कांग्रेस ने पलटवार में कहा कि, रामदेव जैसे लोग बीजेपी के प्रचारक मात्र हैं और आरएसएस की विचारधारा ही समाज को बांटती है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर लिखा, “आरएसएस का बचाव करने वाले खुद राष्ट्रहित की बात करें।”
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद चुनावी बहस को और गरमा देगा, जहां हिंदुत्व और राष्ट्रवाद मुद्दे केंद्र में रहेंगे। बाबा रामदेव, जो अक्सर सियासी टिप्पणियों से सुर्खियों में रहते हैं, ने पीएम मोदी की तारीफ भी की उन्हें ‘हिमालय जैसा अटल’ बताया। कुल मिलाकर, यह बयानबाजी सियासी घमासान को नई ऊंचाई दे रही है, और बिहार की जनता के बीच ध्रुवीकरण बढ़ा सकती है।








