लखनऊ, 2 अक्टूबर 2025। Azam Khan: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान इन दिनों अपनी बेबाकी भरी बयानबाजी से उत्तर प्रदेश की राजनीति को हिलाने में जुटे हैं। सीतापुर जेल में 23 महीनों की कैद काट चुके आजम पर मुर्गी चोरी से लेकर भैंस, किताब और फर्नीचर डकैती जैसे हास्यास्पद मुकदमों का बोझ रहा। एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने इन सभी मामलों को सियासी साजिश करार देते हुए खुलकर अपना पक्ष रखा।
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आजम ने तंज कसते हुए कहा, “मुर्गी भी चोरी कराई और हाथ में नहीं आई। इतनी डकैतियां हुईं तो पैसा कहां गया?” उन्होंने विपक्ष पर बदनामी का आरोप लगाया, जो उनकी जनसेवा को निशाना बनाने की कोशिश थी। आजम ने अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि विधायक-मंत्री का असली काम राशन कार्ड बनवाना, विधवा पेंशन दिलाना, बीमारों का इलाज करवाना और सड़क-गलियां बनवाना है।
उन्होंने जेल के कठोर अनुभव साझा किए, जहां न अखबार मिला, न बाहर की खबर। गंभीर अपराधियों को सुविधाएं मिलीं, लेकिन उन्हें फोन तक की इजाजत न दी गई। “सन्नाटे में सिर्फ खुदा को याद किया,” उन्होंने बताया। कैद ने उन्हें शारीरिक-मानसिक रूप से तोड़ दिया, लेकिन उनकी आस्था अटल रही।एजेंसियों की जांच पर आजम ने कहा कि ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स ने छापों में घर की दीवारें तोड़ने की धमकी दी, लेकिन हाथ लगे मात्र साढ़े तीन हजार रुपये (उनके पास), 11 हजार (बेटे अब्दुल्ला के पास) और पत्नी के पास 100 ग्राम सोना।
“न विदेशी बैंक खाता, न बेहिसाब संपत्ति। सिर्फ सैलरी-पेंशन के खाते,” उन्होंने स्पष्ट किया। सपा के साथ अपनी निष्ठा दोहराते हुए उन्होंने मुलायम सिंह यादव के दौर की तारीफ की, लेकिन अखिलेश यादव की कार्यशैली पर असंतोष जताया। बीएसपी में जाने की अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “मैं सपा का सिपाही हूं।”इंटरव्यू में पुराने अंदाज में शायरी भी छेड़ी: “न खुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम, न इधर के हुए न उधर के हुए।” अपनी तकलीफों पर कहा, “अपने वजूद पर शर्मिंदगी होती है। वतन में बेवतन, गद्दार कहलाए।” आजम का यह बयान सियासी गलियारों में बहस छेड़ रहा है। क्या यह उनकी राजनीतिक वापसी का संकेत है? समय बताएगा, लेकिन उनकी आवाज दबने वाली नहीं लगती।
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