नई दिल्ली, 19 सितंबर 2025। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को उद्योगपति अनिल अंबानी और यस बैंक के पूर्व सीईओ राणा कपूर समेत कई लोगों के खिलाफ दो मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया है। यह मामला यस बैंक को 2,796 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले कथित धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़ा है। मुंबई की एक विशेष अदालत में दाखिल इस आरोपपत्र में अनिल धीरूभाई अंबानी (एडीए) ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी को मुख्य आरोपी बनाया गया है।
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सीबीआई के अनुसार, राणा कपूर ने अपनी आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग करते हुए यस बैंक के सार्वजनिक धन को आर्थिक रूप से तनावग्रस्त एडीए ग्रुप की कंपनियों में डाला, जबकि बदले में अंबानी ग्रुप ने कपूर के परिवार की कंपनियों को सस्ते दरों पर ऋण और निवेश की सुविधा प्रदान की।जांच में सामने आया है कि 2017 में राणा कपूर की मंजूरी से यस बैंक ने रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) में 2,045 करोड़ रुपये और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) में 2,965 करोड़ रुपये के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर और वाणिज्यिक कागजात में निवेश किया। उस समय केयर रेटिंग्स ने एडीए ग्रुप की वित्तीय कंपनियों को ‘अंडर वॉच’ की चेतावनी दी थी, फिर भी यह निवेश किया गया।

सीबीआई का दावा है कि ये फंड कई स्तरों से साइफन किए गए, जो सार्वजनिक धन की व्यवस्थित डायवर्जन को दर्शाता है। बदले में, आरसीएफएल और आरएचएफएल ने कपूर की पत्नी बिंदू कपूर और बेटियों राधा कपूर व रोशनी कपूर की कंपनियों—जैसे आरएबी एंटरप्राइजेज, इमेजिन एस्टेट, ब्लिस हाउस, इमेजिन हैबिटेट, इमेजिन रेसिडेंस और मॉर्गन क्रेडिट्स—को रियायती दरों पर क्रेडिट सुविधाएं दीं। इसके अलावा, रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड ने अंबानी के निर्देश पर 2017-18 में मॉर्गन क्रेडिट्स में 1,160 करोड़ का निवेश किया। यस बैंक ने एडीए ग्रुप के डिबेंचर भी खरीदे और बैंक के हाई-रिस्क एटी1 बॉन्ड्स में 1,750 करोड़ लगाए, जो बाद में बैंक संकट के दौरान राइटन-ऑफ हो गए।
यह मामला 2022 में यस बैंक के चीफ विजिलेंस ऑफिसर की शिकायत पर दर्ज हुआ था। आरोपपत्र में अनिल अंबानी के अलावा राणा कपूर, बिंदू कपूर, राधा कपूर, रोशनी कपूर, आरसीएफएल, आरएचएफएल (अब ऑथम इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड), आरएबी एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, इमेजिन एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, ब्लिस हाउस प्राइवेट लिमिटेड, इमेजिन हैबिटेट प्राइवेट लिमिटेड, इमेजिन रेसिडेंस प्राइवेट लिमिटेड और मॉर्गन क्रेडिट्स प्राइवेट लिमिटेड को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं के तहत नामित किया गया है।
सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा, “यह धोखाधड़ी भरा इंतजाम यस बैंक को 2,796.77 करोड़ का गलत नुकसान पहुंचाया और आरोपी पक्षों को अनुचित लाभ दिया।”एडीए ग्रुप की ओर से अभी कोई टिप्पणी नहीं आई है। यह केस यस बैंक के पूर्व प्रमोटरों डीएचएफएल के वाधवान बंधुओं से जुड़े अन्य मामलों से मिलता-जुलता है, जहां भी धोखाधड़ी के आरोप लगे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आरोपपत्र कॉरपोरेट गवर्नेंस और बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। अदालत अब आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू करेगी, जिससे अंबानी और कपूर की कानूनी मुश्किलें और गहरी हो सकती हैं। यह घटना भारतीय वित्तीय बाजार में विश्वास बहाली के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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