नई दिल्ली, 3 जनवरी 2025। Water Crisis Delhi: राजधानी दिल्ली में भूजल के अत्यधिक दोहन को रोकने के लिए दिल्ली जल बोर्ड (DJB) लंबे समय से नई गाइडलाइंस तैयार कर रहा है। मौजूदा नियमों में अवैध भूजल निकासी पर सख्त कार्रवाई के पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं, जिसके कारण चोरी-छिपे बोरवेल और ट्यूबवेल से पानी निकालने का सिलसिला जारी है। इनका कमर्शियल इस्तेमाल भी बड़े पैमाने पर हो रहा है, जो भूजल स्तर को लगातार गिरा रहा है।
दिल्ली जल बोर्ड के सूत्रों के अनुसार, सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी (CGWA) ने वर्ष 2020 में नई गाइडलाइंस जारी की थीं, लेकिन दिल्ली में इन्हें पूरी तरह लागू करने में देरी हो रही है। अब दिल्ली सरकार एक व्यापक पॉलिसी फाइनल करने की प्रक्रिया में है, जिसमें अवैध निकासी पर जुर्माना, मीटरिंग अनिवार्य करना और सख्त एनफोर्समेंट शामिल होगा।
CGWA का पुराना नोटिफिकेशन
CGWA ने साल 2020 में नोटिफिकेशन जारी कर भूजल निकासी को नियंत्रित करने के नियम बनाए थे, लेकिन दिल्ली में मुख्य रूप से 2010 का नोटिफिकेशन ही लागू है। इसके तहत अवैध बोरवेल पर अधिकतम कार्रवाई सीलिंग, ड्रिलिंग मशीन जब्ती या बिजली कनेक्शन काटने तक सीमित है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कई बार दिल्ली सरकार और DJB को फटकार लगाई है कि अवैध निकासी रोकने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए जा रहे।
हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली में 20,000 से अधिक अवैध बोरवेल चिह्नित किए गए हैं, जिन्हें सील करने के निर्देश जारी हो चुके हैं। Paharganj जैसे क्षेत्रों में होटलों द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध निकासी की जांच अभी चल रही है।
नई गाइडलाइंस में क्या बदलाव हो सकते हैं
नई पॉलिसी में बोरवेल या ट्यूबवेल की परमिशन प्रक्रिया को सख्त बनाया जाएगा। उन क्षेत्रों को चिह्नित किया जाएगा जहां भूजल स्तर सुधरा है—वहां सीमित परमिशन दी जा सकती है, जबकि संवेदनशील या ओवर-एक्सप्लॉइटेड जोन्स में पूरी तरह प्रतिबंध लगेगा।
CGWA की 2020 गाइडलाइंस के आधार पर निकासी चार्जेस, NOC अनिवार्यता और रेनवाटर हार्वेस्टिंग को जोर दिया जाएगा। DJB ने NGT को बताया है कि पर्यावरण विभाग से अप्रूवल के बाद जल्द नोटिफिकेशन जारी होगा। इसके अलावा, ट्रीटेड वेस्टवाटर का इस्तेमाल बढ़ाकर भूजल निर्भरता कम करने की योजना है।
क्यों जरूरी हैं नई गाइडलाइंस?
दिल्ली में भूजल निकासी रिचार्ज से अधिक हो गई है। 2023 में निकासी दर 99% तक पहुंच गई, जबकि पहले यह 127% थी। CGWB की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के कई सैंपल्स में यूरेनियम, नाइट्रेट, फ्लोराइड और लेड जैसे प्रदूषक मिले हैं, जो स्वास्थ्य के लिए खतरा हैं। अवैध निकासी के कारण भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, और मौजूदा नियमों में पेनल्टी के कड़े प्रावधान न होने से लोग बेधड़क दोहन कर रहे हैं।
NGT ने बार-बार निर्देश दिए हैं कि मीटरिंग, चार्जेस और एनफोर्समेंट मजबूत किया जाए। अगर आप भूजल का इस्तेमाल करते हैं, तो NOC चेक करें और रेनवाटर हार्वेस्टिंग अपनाएं। नई गाइडलाइंस आने पर सख्ती बढ़ेगी, इसलिए वैकल्पिक स्रोतों पर ध्यान दें।
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