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GST Action: मनरेगा कार्यों से जुड़ी फर्मों पर GST का शिकंजा, 153 फर्मों को नोटिस, 45 लाख रुपये की वसूली

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अमरोहा, 3 जनवरी 2026। GST Action:  उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) योजनाओं के तहत सामग्री आपूर्ति करने वाली फर्मों पर जीएसटी विभाग ने बड़ा एक्शन लिया है। विभाग ने कर चोरी के आरोप में 153 फर्मों को नोटिस जारी किए हैं, जबकि अब तक 45 लाख रुपये की जीएसटी राशि की वसूली की जा चुकी है।

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यह कार्रवाई मनरेगा कार्यों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर जीएसटी भुगतान में अनियमितताओं के बाद शुरू हुई, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा है। जिले में मनरेगा के तहत करोड़ों रुपये के कार्य होते हैं, लेकिन कई सप्लायर्स ने जीएसटी जमा नहीं किया या कम दिखाया। मनरेगा योजनाओं में ग्राम पंचायतों द्वारा सामग्री खरीद पर जीएसटी लागू होता है, और सप्लायर्स को इसे जमा करना अनिवार्य है।

अमरोहा में जीएसटी विभाग की जांच में पाया गया कि कई रजिस्टर्ड फर्मों ने मनरेगा कार्यों के लिए की गई सप्लाई पर पूरा टैक्स नहीं चुकाया। विशेष रूप से हसनपुर ब्लॉक और अन्य क्षेत्रों की फर्मों पर फोकस किया गया। विभाग ने इन फर्मों के रिकॉर्ड खंगाले और पाया कि करोड़ों की सप्लाई पर लाखों रुपये का जीएसटी बकाया है। नोटिस प्राप्त फर्मों को तय समय में स्पष्टीकरण देने और बकाया जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई की शुरुआत जिले के कमिश्नर और डीएम के स्तर पर हुई अनियमितताओं की शिकायतों से हुई।

एक फर्म में तो 21 लाख से अधिक की गड़बड़ी मिली, जिसके बाद व्यापक जांच शुरू हुई। जीएसटी अधिकारियों की टीमों ने फर्मों के गोदामों और ऑफिसों पर छापे मारे, जहां बिल, इनवॉइस और जीएसटी रिटर्न की तुलना की गई। कई मामलों में फर्मों ने सप्लाई तो दिखाई, लेकिन जीएसटी पोर्टल पर कम या जीरो राशि जमा की। विभाग ने ब्याज और पेनाल्टी सहित वसूली का लक्ष्य रखा है।

अब तक 45 लाख रुपये मौके पर या नोटिस के बाद जमा कराए गए हैं, जबकि कुल बकाया इससे कहीं अधिक होने का अनुमान है। यह अभियान पूरे उत्तर प्रदेश में मनरेगा और पंचायती कार्यों में जीएसटी वसूली को मजबूत करने की दिशा में है। राज्य कर विभाग ने ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू किया है, जिससे हर सप्लाई पर जीएसटी ट्रैक किया जा सके।

अमरोहा जैसे जिलों में जहां मनरेगा का बड़ा स्केल है, ऐसी चोरी से सरकारी खजाने को लाखों-करोड़ों का नुकसान हो रहा था। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम पारदर्शिता बढ़ाएगा और ग्रामीण विकास योजनाओं के फंड का सही उपयोग सुनिश्चित करेगा। फर्म मालिकों में इस कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है। कई ने विभाग से राहत की गुहार लगाई है, लेकिन नियम सख्त हैं। अगर नोटिस का जवाब नहीं दिया गया तो कुर्की और कानूनी कार्रवाई होगी।

जिला प्रशासन ने भी ब्लॉक स्तर पर जांच टीमें गठित की हैं। उम्मीद है कि यह अभियान अन्य जिलों के लिए मिसाल बनेगा और मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में कर अनुपालन मजबूत होगा। इससे न केवल राजस्व बढ़ेगा, बल्कि योजनाओं की विश्वसनीयता भी बनी रहेगी।

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