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नाना पटोले का विवादित बयान, राहुल गांधी को बताया ‘भगवान राम जैसा’, शोषितों की सेवा पर जोर
नई दिल्ली, 1 जनवरी 2026। Political Row: राजनीति में धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल एक बार फिर विवाद का केंद्र बन गया है। महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से करके तीखी बहस छेड़ दी है। पटोले के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे करोड़ों हिंदुओं की आस्था का ‘अक्षम्य’ अपमान करार दिया है।
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बीजेपी ने इसे कांग्रेस की ‘चापलूसी की हद’ बताया और कहा कि यह पार्टी हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने का काम कर रही है। विवाद की शुरुआत पटोले के एक इंटरव्यू से हुई, जहां उनसे पूछा गया कि अयोध्या राम मंदिर बनने के बाद राहुल गांधी अभी तक वहां क्यों नहीं गए। पटोले ने जवाब में कहा, “भगवान राम का काम हमारे नेता राहुल गांधी कर रहे हैं।
भगवान राम का काम ही था शोषितों, वंचितों, पीड़ितों को न्याय दिलाना। पूरे देश में घूमकर हमारे नेता वही काम कर रहे हैं, जो भगवान राम का था। मंदिर में जाकर फोटो सेशन करने से ज्यादा शोषितों-पीड़ितों की सेवा करना राहुल जी को अच्छा लगता है।” पटोले का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद बीजेपी ने हमला बोल दिया। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केसवन ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पटोले को घेरते हुए कहा, “नाना पटोले का राहुल गांधी की भगवान राम से तुलना करना करोड़ों हिंदू भक्तों की भावनाओं और आस्था का एक अक्षम्य गंभीर अपमान है।
पटोले ने पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अयोध्या राम मंदिर दर्शन पर शुद्धिकरण की मांग की थी, जो अनादरपूर्ण था। उनकी शर्मनाक टिप्पणियां और कपटी मानसिकता बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। क्या पटोले राहुल से पूछेंगे कि उन्होंने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को ‘नाच गाना’ क्यों कहा या वे अभी तक मंदिर क्यों नहीं गए?” बीजेपी के एक अन्य प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने चापलूसी की हद दिखाई है। राहुल गांधी को भगवान राम जैसा बता रही है, जबकि पहले सोनिया गांधी को क्रिसमस का श्रेय दे चुकी है। यह वही कांग्रेस है जो राम मंदिर का विरोध करती थी और प्राण प्रतिष्ठा को नाच गाना कहती थी। वे हिंदू आस्था पर लगातार हमले कर रहे हैं।” पूनावाला ने कांग्रेस की ‘कपटी’ राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे बयान धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं।यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब लोकसभा चुनावों की तैयारी चल रही है।
बीजेपी राम मंदिर को अपनी बड़ी उपलब्धि मानती है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक मुद्दा बनने से रोकने की कोशिश करती रही है। पटोले का बयान कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा लगता है, जहां राहुल गांधी को सामाजिक न्याय के प्रतीक के रूप में पेश किया जा रहा है, लेकिन बीजेपी इसे हिंदू वोट बैंक को साधने की कवायद बता रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे बयान चुनावी माहौल को और गरमा सकते हैं, जहां धार्मिक मुद्दे अहम भूमिका निभाते हैं। कांग्रेस ने अभी तक पटोले के बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विवाद बढ़ने की संभावना है।
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