नई दिल्ली, 2 जनवरी 2026। Health Tips: आजकल डायबिटीज और वजन बढ़ने के डर से लोग चीनी की जगह शुगर-फ्री प्रोडक्ट्स का सहारा ले रहे हैं। दुकानों में ‘शुगर-फ्री’, ‘लो-कैलोरी’ या ‘गिल्ट-फ्री’ लिखी मिठाइयां, बिस्किट, च्यूइंग गम, प्रोटीन बार और डाइट ड्रिंक्स आसानी से मिल जाते हैं। लोगों को लगता है कि इनमें चीनी नहीं होने से ये पूरी तरह सुरक्षित हैं। लेकिन हालिया शोध बताते हैं कि शुगर-फ्री स्वीटनर्स, खासकर सॉर्बिटोल, लिवर के लिए खतरा बन सकते हैं। यह कैसे होता है, आइए विस्तार से समझते हैं।
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डायबिटीज का बढ़ता बोझ और शुगर-फ्री का ट्रेंड
डायबिटीज दुनिया भर में तेजी से फैल रही है। अमेरिका में CDC के अनुसार, करीब 38 मिलियन लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जिनमें से कई को पता तक नहीं है। इसी डर से लोग रिफाइंड शुगर छोड़कर आर्टिफिशियल स्वीटनर्स जैसे एस्पार्टेम, सुक्रालोज और शुगर अल्कोहल अपनाने लगे हैं। इनमें सॉर्बिटोल सबसे आम है, जो कम कैलोरी वाला माना जाता रहा है।
सॉर्बिटोल क्या है और कहां मिलता है?
सॉर्बिटोल एक शुगर अल्कोहल है, जो शुगर-फ्री गम, कैंडी, प्रोटीन बार, लो-कैलोरी स्नैक्स, कफ सिरप और कुछ दवाओं में इस्तेमाल होता है। यह प्राकृतिक रूप से सेब, नाशपाती जैसे फलों में भी पाया जाता है। अब तक इसे चीनी से सुरक्षित विकल्प माना जाता था, क्योंकि यह ब्लड शुगर को कम प्रभावित करता है। लेकिन नई रिसर्च इस धारणा को चुनौती दे रही है।
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लिवर पर कैसे पड़ता है असर?
वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी इन सेंट लुइस के वैज्ञानिकों की टीम, जिसका नेतृत्व डॉ. गैरी पैटी कर रहे हैं, ने 2025 में Science Signaling जर्नल में एक महत्वपूर्ण अध्ययन प्रकाशित किया। यह शोध जीब्राफिश मॉडल पर आधारित है। अध्ययन में पाया गया कि सॉर्बिटोल शरीर में फ्रक्टोज में बदल सकता है, जो लिवर के लिए हानिकारक है। फ्रक्टोज को पहले से ही फैटी लिवर डिजीज (स्टेटोटिक लिवर डिजीज) का बड़ा कारण माना जाता है, जो दुनिया भर में 30% वयस्कों को प्रभावित कर रही है।
शोध के अनुसार, खाना खाने के बाद ग्लूकोज आंत में सॉर्बिटोल में बदल सकता है। सामान्य स्थिति में गट बैक्टीरिया (जैसे Aeromonas) सॉर्बिटोल को बेअसर कर देते हैं, लेकिन अगर बैक्टीरिया कम हों (एंटीबायोटिक्स से या असंतुलित डाइट से) या सॉर्बिटोल ज्यादा हो, तो यह लिवर तक पहुंच जाता है। लिवर में सॉर्बिटोल फ्रक्टोज डेरिवेटिव में बदल जाता है, जो फैट जमा करने की प्रक्रिया (लिपोजेनेसिस) को बढ़ावा देता है। इससे फैटी लिवर की समस्या हो सकती है।
डॉ. कहते हैं कि सॉर्बिटोल फ्रक्टोज से महज ‘एक ट्रांसफॉर्मेशन दूर’ है, इसलिए यह समान नुकसान कर सकता है। यह खोज हैरान करने वाली है, क्योंकि पहले सॉर्बिटोल को मुख्य रूप से डायबिटीज मरीजों में हाई ग्लूकोज से जोड़ा जाता था, लेकिन अब पता चला कि सामान्य डाइट में भी यह बन सकता है।
क्या करें बचाव के लिए?
शुगर-फ्री प्रोडक्ट्स का अत्यधिक सेवन न करें।
गट हेल्थ सुधारें,प्रोबायोटिक्स, फाइबर युक्त भोजन लें।
लेबल चेक करें और सॉर्बिटोल वाली चीजें सीमित रखें।
प्राकृतिक मिठास जैसे फल चुनें, लेकिन संतुलित मात्रा में।
डॉक्टर से सलाह लें, खासकर अगर लिवर या डायबिटीज की समस्या हो।
यह शोध बताता है कि शुगर-फ्री हमेशा ‘फ्री’ नहीं होता। संतुलित डाइट और जीवनशैली ही असली सुरक्षा है।
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